Saturday, 13 August 2016

how to stay healthy (in hindi)

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जब से मैने होश सम्भाला है अधिकांशतः लोगो को तरह तरह की बीमारियो से घिरा पाया है आज के समय मे निरोगी जीवन, एक सपाना बनकर रह गया है डाक्टर आज परिवारिक सदस्य की तरह हो गये है एसा परिवार मिलना आज के समय मे मुश्किल है जिसमे किसी न किसी सदस्य  को कोई गम्भीर बीमारी न हो अधिकांशतः परिवार  तो एसे है परिवार के सभी सदस्य बीमार है ।  ऐसा लगता है बच्चे के पैदा होते ही डाक्टर से उसका ऐसा सम्बन्ध बन जाता है जैसे मा –बाप के बाद जो उसे सबसे प्रिय है वह डाक्टर ही है जो उसके मरने तक डाक्टर से उसका सम्बन्ध बना रहता है । निरोगी व्यक्ति निरोगी परिवार मिलना आज के समय मे मुश्किल हो गया है । मगर मेरा अपना अनुभन है अगर हम अपनी जीवनशैली मे थोड़ा सा परिवर्तन कर ले तो हम निरोगी जीवन जी सकते है । भारत जैसे देश मे यह मुश्किल नही है । जितना आप प्रकृति के नजदीक रहेगे उतना आप स्वस्थ रहेगे । मेरा परिवार भी एक समय डाक्टरो के चक्कर काटता रहता था । कुछ ऐसी बीमारियाँ थी जो आज मै काफी लोगो मे देखता हूँ । डाक्टरो का कहना था दवाई आप को जिन्दगी भर खानी पड़ेगी ।
  हमारे जीवन मे दो महापुरुषों का प्रेवेश  हुआ
 1-ओशो  जिनकी ध्यान की जादूई विधियो द्वारा जीवन मे आन्नद की लहर दौड़ने लगी
 2-राजीव दिक्षित जिनकी बताई गयी छोटी –छोटि बातो को जीवन मे उतारने का प्रयास किया
और आज दस वर्ष से ऊपए हो गये है एलोपैथी दवाईया और डाक्टर से दूर है ।
दोनो  ही महापुरुषो मे एक समानता थी दोनो का ही जोर  एक बात पर है जितने आप प्रकृति के नजदीक रहेगे उतने आप स्वस्थ और आन्नद से रहेगे ।
मै आप को ऐसी छोटी छोटी बाते बता रहा हू जिनको अपनाकर आप भी निरोगी व आन्नदित जीवन जी सकते है।
1-प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व सोकर उठे । उठकर जितना हो सके घुट घुँट पानी पिय्रे  ।
2-प्रतिदिन प्राणायाम ध्यानयोग करे । नियमित रुप से सक्रिय ध्यान करने से सम्पूर्ण शरीर की मांसपेशियाँ सक्रिय हो जाती है रक्तसंचार बढ़ता है शरीर मे चुस्ती फुर्ती आती है । मधुमेह थाइराइड ब्लडप्रेशर ह्रदय रोग मोटापा आदि अनेक रोगो मे लाभ होता है ।
3-स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ मन निवास करता है इसलिए शरीर को स्वस्थ रखे ।
4-रिफाइन्ड के स्थान पर सरसो का तेल या देशी घी का उपयोग करे।
5-एल्यूमिनियम के किसी भी बरतन का उपयोग न करे,कुकर का भी नही ।
6- हमारे देश के अधिकांश हिस्सो की जलवायू गर्म है इसलिए चाय का प्रयोग न करे ।
इसके स्थान पर दिव्यपेय या कोई प्राकृतिक चाय का उपयोग कर सकते है ।
7-कोल्डड्रिन्क के स्थान पर निंबूपानी का उपयोग करे
8-पिज्जा बर्गर चाउमिन आदि फास्टफ्रुड से स्वंय एवं बच्चो को दूर रखे।
9-फ्रिज  के पानी के स्थान पर घड़े के पानी का प्रयोग करे ।
10-नित्य या हफ्ते मे एक बार पूरे शरीर की तिल के तेल से या सरसो के तेल से मालिश करे ।
11-नित्य अपने भोजन मे फलो और कच्ची सब्जियो को सामिल करे ।
12- हमेशा शान्त और प्रसन्न रहे कम बोलने की आदत डाले जितना आवश्यक हो उतना ही बोले ।
13-भोजन करते समय क्रोध न करे । भोजन थोड़ा थोड़ा परमात्मा का प्रसाद समझते हुए प्रेम से खाये । कभी भोजन मे कमी न निकाले । अगर नमक कम रह जाये या न डाला गया हो तो ऊपर से नमक न डाले । न ही भोजन मे कमी निकाले । उसे स्वाद ले लेकर धीरे धीरे खाये
14-अच्छा साहित्य पढे । कुछ अच्छा पढकर ही घर से निकले । अश्लील एवं उत्तेजक साहित्य पढ़ने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ।
15-शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दवाइयों का सहारा लेने की उतनी आवश्यकता नही है जितनी शरीर के अंगो को स्वस्थ और मजबूत रखने की आवश्यकता है ।
16-प्राकृतिक चीजो का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करे ।
17- सैम्पू और साबुन के स्थान पर मुलतानी मिट्टी का उपयोग करे ।
18-भोजन के पश्चात या बीच मे पानी का सेवन न करे । पानी भोजन करने के 60 मिनट पश्चात और भोजन करने के 45 मिनट पूर्व पीना चाहिए ।
19-रात्रि मे भोजन न करे तो अच्छा है अगर लेना हो तो हल्का भोजन ले ।
20-हमेशा हँसते रहिए दिन म्रे कम से कम 4-5 बार अवश्य जोर से ठहाका लगा कर हँसे ।
आपकी रसोई आपका सबसे अच्छा औषद्यालय है।
1-खांसी –काली मिर्च को महीन पीसकर शहद या मिश्री के साथ  खाये । सुखी खाँसी मे शीघ्र आराम होगा ।
 दुध मे ½ चम्मच हल्दी एक चुटकी सोंठ पाउडर पकाकर ले किसी भी प्रकार की खांसी व गले मे कैसा भी इंफैकशन हो शीघ्र आराम होगा । किसी भी प्रकार के दर्द चोट मे भी लाभदायक है । इसके सेवन से जुकाम भी अतिशिघ्र ठीक हो जाता है ।

सुखा धनिया चुसन्रे से सुखा धस्का, गले मे टान्सिल को शीघ्र आराम मिलता है ।
2-आज के समय मे सबसे बड़ी समस्या पेट की है । अगर आप को खाना हजम नही होता है आपको कई बार प्रेशर बनता है । जीरा और सोंफ 50-50ग्राम लेकर अलग-अलग तवे पर भून लीजिए । फिर इसको मिक्सी मे पीसकर चूर्ण बना लीजिए । खाना खाने के बाद ½ चम्मच सादे पानी से खाये ।
कब्ज हो तो इसका सेवन गर्म पानी से करे ।
3- मुँह मे छाले हो तो जीरा और बड़ी इलाइची बराबर मात्रा मे लेकर पीस ले । दिन मे 3-4 बार ले । अतिशीघ्र लाभ होगा ।
4- आँखों की रोशनी बढानी हो तो नित्य प्रातः मुँह  की राल आँखों मे काजल की तरह से लगाये।
मुँह मे पानी भरकर आँखों मे पानी के झपाके दे । कुछ समय के प्रयोग से आँखों की रोशनी बढने लगती है।
5-प्रतिदिन भोजन के बाद एक लोंग मुँह मे रखकर चूसने से मुँह मे बदबू नही आती है ।
6-भुख न लग रही हो खाने से अरुचि हो तो धनिया छोटी इलाइची और काली मिर्च का समान मात्रा मे चूर्ण बना ले । और इसमे समान मात्रा मे घी और मिश्री मिलाकर खाये ।
7-हाथ पैरो मे दर्द हो तो 100ग्राम सरसो का तेल पका ले जब वह ठंडा हो जाये उसमे 5 ग्राम कपूर मिला कर कांच की शीशी मे भरकर रख ले । जहाँ दर्द हो वहाँ हल्के हाथो से मालिश करे । मालिश हमेशा ऊपर से नीचे की और करे ।
8-नारियल के तेल मे निंबू का रस मिलाकर मालिश करने से खुजली ठीक हो जाती है ।
9- सेंधा नमक का कपड़छन चूर्ण हल्दी सरसो के तेल मे मिलाकर दाँतों एवं मसूड़ों मे धीरे धीरे मलने से मुख की दुर्गंध और पायरिया ठीक हो जाता है । दाँत स्वच्छ और मजबूत बनते है ।
10 – कब्ज मे एक चम्मच सोंफ 5 काली मिर्च चबाकर एक गिलास गर्म पानी मे नींबू और काला नमक मिलाकर रत्रि मे सोते समय पीले ।


           
   





 

Wednesday, 10 August 2016

स्तनों के आकर्षण का वैज्ञानिक अर्थ और उससे मुक्त होने का बेजोड़ प्रयोग (osho)

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एक मित्र ने मुझे सवाल पूछा है कि यह जो यहां कीर्तन होता है, यह बहुत खतरनाक चीज है। और यह तो ऐसा मालूम पड़ता है कि कीर्तन करने वाले साधु, संन्यासी, संन्यासिनिया कामवासना निकाल रहे हैं अपनी! और उन्हीं मित्र ने आगे पूछा है कि यह भी मुझे पूछना है कि जब मैं लोगों को कीर्तन करते देखता हूं? तो अगर स्त्रियां कीर्तन कर रही हैं, तो मेरा ध्यान उनके स्तन पर ही जाता है!
अब कीर्तन करते समय जिसका ध्यान स्तन पर जा रहा हो, वह यह कह रहा है कि उसे लगता है कि सब संन्यासी अपनी कामवासना निकाल रहे हैं! उसे यह खयाल नहीं आता कि उसे जो दिखाई पड रहा है, वह उसके संबंध में खबर है, किसी और के सबंध में खबर नहीं है। और वह खुद ही नीचे लिख रहा है कि मुझे उनके स्तन पर ध्यान जाता है।
निश्चित ही, इस व्यक्ति को मां के स्तन से दूध पीने का पूरा मौका नहीं मिला होगा। इसको स्तन में अभी भी अटकाव रह गया है। इसको एक काम करना चाहिए। बच्चों के लिए जो दूध पीने की बोतल आती है, वह खरीद लेनी चाहिए। उसमें दूध भरकर रात उसको चूसना चाहिए, दस—पंद्रह मिनट सोने के पहले। तीन महीने के भीतर इसको स्तन दिखाई पड़ने बंद हो जाएंगे।
स्तन दिखाई पड़ने का मतलब ही यह है कि बच्चे का जो रस था स्तन में, वह कायम रह गया है। स्तन पूरा नहीं पीया जा सका। इसलिए आदिवासियों में जाएं, जहां बच्चे पूरी तरह अपनी मां का स्तन पीते हैं, वहा किसी की उत्सुकता स्तन में नहीं है। अगर आप आदिवासी स्त्री को, हाथ रखकर भी उसके स्तन पर, पूछें कि यह क्या है? तो वह कहेगी कि दूध पिलाने का थन है। आप अपने इस समाज की स्त्री के स्तन की तरफ आंख भी उठाएं, वह भी बेचैन, आप भी बेचैन। आप भी आंख बचाते हैं, तब भी बेचैन, वह भी स्तन को छिपा रही है और बेचैन है। और छिपाकर भी प्रकट करने की पूरी कोशिश कर रही है, उसमें भी बेचैन है।
और सबकी नजर वहीं लगी हुई है। चाहे फिल्म देखने जाएं, चाहे उपन्यास पढ़ें, चाहे कविता करें, चाहे कहानी लिखें, स्तन बिलकुल जरूरी हैं! अगर कभी कोई दूसरे ग्रह की सभ्यता के लोग इस जमीन पर आए , तो वे हमें कहेंगे कि ये लोग स्तनों से बीमार समाज है। क्योंकि मूर्ति बनाओ तो, चित्र बनाओ तो, स्तन पहली चीज है; स्त्री गौण है। मगर यह बच्चे का दृष्टिकोण है। असल में बच्चा जब पहली दफा मां से संबंधित होता है—और वह उसका पहला संबंध है, उसके पहले उसका कोई संबंध किसी से नहीं है, वह उसका पहला समाज में पदार्पण है, वह उसका पहला अनुभव है दूसरे का—तो वह पूरी मां से संबंधित नहीं होता; सिर्फ उसके स्तन से संबंधित होता है। पहला अनुभव स्तन का है। और पहले वह स्तन को ही पहचानता है; मां पीछे आती है। स्तन प्रमुख है, मां गौण है। और अगर आपको बाद की उम्र में भी स्तन प्रमुख है, स्त्री गौण लगती है, तो आप बचकाने हैं और आपकी बुद्धि परिपक्व नहीं हो पाई। आपको फिर से स्तन नकली खरीदकर बाजार से, पीना शुरू कर देना चाहिए। उससे राहत मिलेगी।
गुरु बोलता था, शिष्य सुनता था। लेकिन शिष्य के सुनने में भी गुरु देखता था,उसका  रस कहां है! उसकी आंख कहा चमकने लगती है और कहा फीकी हो जाती है! कहा उसकी आंख की पुतली खुल जाती है और फैल जाती है, और कहा सिकुड़ जाती है! कहां उसकी रीढ़ सीधी हो जाती है, और कहां वह शिथिल होकर बैठ जाता है! वह देख रहा है। बाहर और भीतर उसकी चेतना में क्या हो रहा है, वह देख रहा है। और इस माध्यम से वह भी चुन रहा है कि इस शिष्य के लिए क्या जरूरी होगा, क्या उपयोगी होगा।
इसलिए कृष्ण ने सारे मार्गों की बात कही है। उन सारे मार्गों पर अर्जुन को चलना नहीं है। अर्जुन को चलना तो होगा एक ही मार्ग पर। लेकिन इन सारो को चलने के पहले जान लेना जरूरी है।
ओशो
गीता दर्शन

power politics (osho)


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इस दुनिया में सारे लोग कहते हैं, अच्छे हो जाओ। लेकिन वह आपको कहते ही इसलिए हैं कि आप अच्‍छे हो नहीं पाते। और अच्‍छे हो जाओ, यह कह कर वे आपकी निंदा कर देते है और आपको दबा देते हैं। एक दूसरे को डॉमिनेट करने का यह उपाय है। अगर आप सच में अच्छे हो जाओ, तो जो जो आपको अच्छा बनाना चाहते थे, वे सबसे पहले आपके प्रति असंतुष्ट हो जाएंगे। क्योंकि उनकी मालकियत खो जाएगी और उनके हाथ के नीचे से दबा हुआ आदमी मुक्त हो जाएगा।
तो जितने लोग कहते हैं, अच्छे हो जाओ, यह पावर पालिटिक्स है, इसके भीतर राजनीति है। लेकिन कोई किसी को अच्छा देखना नहीं चाहता। क्योंकि अच्छा देखने से ही खुद नीचा हो जाता है, दूसरा ऊपर हो जाता है। जिंदगी का जाल है।
लेकिन एक बात खयाल रखनी जरूरी है तुम जो भी हो, जहां भी हो, वहीं से रास्ता परमात्मा तक आता है। ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां से उसका रास्ता न जाता हो। इसलिए हर जगह का उपयोग कर लेना और हर अनुभव को उसकी दिशा में मोड़ देना।
बुरे से बुरा अनुभव भी उसकी दिशा में मुड़ जाता है। और पाप से पाप भरा हुआ अनुभव भी, उसकी तरफ मुड़ते ही पुण्य हो जाता है। लेकिन यह सारा का सारा आसान है करना, अगर एक बात खयाल में रहे कि इस जगत में हम अलग नहीं हैं, एक ही चैतन्य के हिस्से हैं, एक ही बड़े सागर की लहरें हैं।
साधना सूत्र
ओशो

how to increase memory ( in hindi)

                          स्मरणशक्ति कैसे बढ़ाए      

                            

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जो भी हम देखते सुनते है पढ़ते है, कार्य करते है इन सब का संग्रह करना स्मरण शक्ति का कार्य है और समय पर प्रकट करना स्मृति का कार्य है ।  हमारे मस्तिष्क मे संग्रह तो सब रहता है मगर समय पर प्रकट नही होता उसे स्मरण शक्ति की दुर्बलता कहा जाता है । जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है स्मरणशक्ति दुर्बल होती जाती है ।

  स्मरण शक्ति दुर्बल होती क्यो है  ?

जो भी हम आहार लेते है वह पचकर रस बनता है रस से मॉस  मज्जा रक्त  हड्डी और वीर्य का निर्माण होता है इन सब मे वीर्य शक्तिरुप होने पर ओज कहलाता है और  ओज से ही शरीर तेजवान बनता है ओज से ही मस्तिष्क पुष्ट होता है और स्मरणशक्ति को भी ठीक रखता है । चेहरे की आभा ओज से ही है ओज बनता है वीर्य से, वीर्य का धारण होता है ब्रहमच्रर्य से। और जिस प्रकार से आज हम काम वासना की और सम्मोहित हो रहे है मस्तिष्क से सम्बन्धित  बीमारिया बढ़ती जा रही है स्मरणशक्ति दुर्बल होती जा रही है कामवासना जैसे जैसे बढ़ेगी वीर्य का नाश होगा और वीर्य का नाश होने से ओज का क्षय होता है ओज के क्षय से स्मरणशक्ति कम होती चली जाती है ।
 दैनिक जीवन मे तनाव भरी जीवन शैली का भी मस्तिष्क  पर प्रभाव पड़ता है । मस्तिष्क के थक जाने पर स्मरण शक्ति धीरे धीरे कमजोर होने लगती है । शरीर के स्वस्थ रखने के बारे मे तो थोड़ा बहुत सोचते भी है मगर मस्तिष्क के बारे मे सोचते ही नही ।
 उम्र बढ़ने के साथ ही वीर्य बनना कम हो जाता है वीर्य नही बनता तो ओज नही बनता । इसलिए उम्र बढ़ने के साथ ही स्मरण शक्ति कम होती चली जाती है ।

  स्मरण शक्ति कैसे बढाये ।

1-      प्रतिदिन प्राणायाम , ध्यान करने से स्मरणशक्ति बढती है । कम से कम 30 मिनट शान्त एकाग्र होकर अवश्य बैठे ।
2-      सूर्यप्रणाम प्रतिदिन करे
3-      हमेशा अध्यात्मिक सकरात्मक साहित्य पढे ।
4-      नकरात्मक लोगो को, विचारो को अपने से दूर रखे ।
5-      अपने दिन की शुरुआत हमेशा उत्साह से करे ।
6-      हमेशा सन्तुलित सात्विक भोजन करे । भोजन से ही रस वीर्य ओज बनता है भोजन कभी क्रोध मे न करे । भोजन हमेशा शान्तचित  एकाग्रता  शुद्ध वातावरण मे  करे ।
7-      रात्रि सोने से पुर्व  दिन भर किये अच्छे व सकरात्म कार्यो को याद करे ।
8-      हमेशा उन बातो का स्मरण करे जिन्हे याद करके आन्नद की अनुभूति होती हो । कभी उन बातो को स्मरण न रखे जिन्हे याद करके दुख या क्रोध उतपन्न  होता हो ।
9-      हमेशा छोटी छोटी खुशियो को भी उत्सव की तरह मनाये ।
10-   हमेशा दुसरो मे अच्छे गुणो को देखे दुसरे की बुराईयो को नजरान्दाज करे ।

स्मरण शक्ति बढाने के घरेलू व आयुर्वेदिक उपचार

     

1       -      असगन्ध नागोरी, शतावरी, सफेद मुसली सुबह शाम दुध से ले  ।
2       -      ब्राहमी रसायन सुबह शाम दुध से ले ।
3       -      अखरोट की गिरी  भी प्रतिदिन खाने से काफी लाभ होता है ।
4       -      भूने हूए चने और किसमिस खाये ।
5       -      गाजर चुकन्दर व अनार सेब नियमित खाने से काफी लाभ होता है ।
6       -      बदाम सोफ मिश्री बराबर मात्रा मे लेकर चूर्ण बना ले । नियमित लेने से स्मरण शक्ति तो बढ़ती  है साथ ही आँखों की रोशनी भी तेज होती है ।
7       -      दालचीनी का पाउडर बना ले उसको शहद के साथ खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती  है
8       -      सात बदाम (छिलका उतरे हुए ) सात मुनक्का पाँच कालीमिर्च प्रतिदिन खाने से स्मरण शक्ति  बढ़ती है।





Thursday, 30 June 2016

eye side weak solution (in hindi)

               Image result for beautiful eyes                                                                          आँखो  हमारे शरीर का अनमोल महत्वपूर्ण अंग है जरा सोचिए आँखो के बिना यह जीवन कैसा होगा कल्पना मात्र से ही रुह काँप जाती है आज जब हम देखते है छोटे छोटे बच्चो के चश्मे लग रहे है चश्मा का उपयोग नेत्र रोग का विकल्प नही है बल्कि इसका उपयोग करके हम सदा के लिए चश्मे के गुलाम हो जाते है । अगर हम आँखों के प्रति थोड़ा सा भी सजग रहे और थोड़ा सा नियमो का प्रतिदिन पालन करे तो आँखें जीवन भर स्वस्थ रह सकती है।
1 –सुबह उठकर सर्वप्रथम मुहँ की राल (saliva) को आँखों मे काजल की तरह से लगाए इसके बाद ही पानी पानी पिए ।
2- प्रतिदिन मुँह  मे पानी भरकर आँखों मे 40 – 50 बार छीटा मारकर धोए । इसे आँखो का स्नान कहते है इसे कम से कम दिन मे में 3 -4 बार अवश्य करे । पढ़ाई करते समय कम्प्यूटर पर कार्य करते समय आँखों मे थकान महसूस दे तो ताजे पानी से इसी प्रकार आँखों को स्नान कराए ।
3- नेत्रो का व्ययाम – अपनी पलको को तेजी से  बंद करे और खोले एक समय मे 4 – 5 बार । करे व इससे आँखों की थकान दूर होती है ।
4- पैरो के तलवो की सरसो के तेल से मालिश करे और पैरो के अंगुठो के नाखून मे सरसो का तेल डाले । इससे नेत्र ज्योति बढती है ।
5- 100ग्राम बादाम की गिरी   100ग्राम सोंफ      100ग्राम मिश्री
इन तीनो को पिसकर  चूर्ण बना ले । इसका सुबह और रात्रि सोते समय एक छोटा चम्मच खाये । इस प्रयोग से आँखों की रोशनी भी बढ़ती है और आँखें स्वस्थ भी रहती है । 
6- रात्रि मे त्रिफला चूर्ण पानी मे भीगो कर रख दे प्रातः पानी को छानकर आँखे धोए
आँखों की करे देखभाल
1-तेज धुप से बचने के लिए चश्मे का प्रयोग करे । छाया मे चश्मे का प्रयोग न करे।
2-पढ़ते समय पुस्तक आँखों से एक फिट की दूरी पर रखनी चाहिए । बीच – बीच मे 30 सैकिंड के लिए आँखे बंद कर ले और धीरे – धीरे खोले  इससे आँखों को विश्राम मिलता है ।
3-सिर पर गर्म पानी न डाले । न ही आँखों को गर्म पानी से धोए ।
4-किसी दुसरे व्यक्ति के चश्मे का प्रयोग न करे और न ही अत्यन्त तेज प्रकाश, बल्ब, सुर्यग्रहण चन्द्रग्रहण्को लगातार देखे ।
5-अगर आँख मे कुछ गिर गया हो तो आँख को कभी न रगड़े।बल्कि किसी चोड़े बर्तन मे पानी भर कर उसमे आँख को बार –बार खोले बन्द करे ।
6- हरी घास पर चलना व हरियाली देखना आँखों के लिए लाभप्रद है।
7-नेत्र ज्योति का सम्बन्ध पेट से व हमारे अहार से भी है पेट खराब होने से शरीर मे कई विकार उतपन्न हो जाते है । अगर हम पेट सही रखे कब्ज आदि न होने दे तो हम नेत्र दोष से भी बच सकते है ।
8- नेत्र दोष मे विटामिनो का भी महत्वपुर्ण स्थान है जैसे विटामिन ए की कमी से नेत्र ज्योति कम हो जाती है । विटामिन बी की कमी से आँखे लाल रहती है । और उसमे जलन होने लगती है ने और जलन पर पानी भी बहने लगता है । विटामिन सी की कमी से आँखे भारी भारी रहती है जलदी थक जाती है ।  हमे शरीर व आँखों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन प्रचुर मात्रा मे लेते रहने चाहिए ।
9- चाँदनी रात मे चाँद की तरफ देखते रहने से भी आँखों की रोशनी तेज होती है।

10-सिर पर हेयरड्रायर का प्रयोग आँखों के लिए हानिकारक होता है । 

Wednesday, 29 June 2016

भगवान अकेला है

मैंने सुनी है एक कहानी। 
एक मुसलमान फकीर था। वह रात सोया ।
उसने एक स्वप्न देखा की वह स्वर्ग चला गया है।
सपने में हि लोग स्वर्ग जाते है। असलियत में तो नर्क चले जाए
लेकिन स्वप्न में कोई नर्क क्यों जाए? स्वप्न में तो कम से कम
स्वर्ग जाना चाहिए।
स्वप्न में वह चला गया। और देखता है की स्वर्ग के रास्ते पर
बड़ी भीड़ भाड़ है, लाखों लोगों की भीड़ है।
उसने पूछा की क्या बात है आज?
तो भीड़ के रास्ते चलते किसी आदमी ने कहा की
भगवान का जन्म दिन है। उसका जलसा मनाया जा रहा है।
तो उसने कहा बड़े सौभाग्य मेरे, भगवान के बहोत दिनों से दर्शन करने थे।
वह मौका मिल गया। आज भगवान का जन्म दिन है,
अच्छे मौके पर में स्वर्ग आ गया।
वह भी रास्ते के किनारे लाखों दर्शको की भीड़ में खड़ा हो गया ।
फिर एक घोड़े पर सवार एक बहोत शानदार आदमी,
उसके साथ लाखो लोग निकले। वह झुककर लोगो से पूछता है
क्या जो घोड़े पर सवार है वे ही भगवान है ?
तो किसी ने कहा, नही वह भगवान नही है ,
यह हज़रत मोहम्मद है और उनके पीछे
उनको मानने वाले लोग है ।
वह जुलुस निकल गया। फिर दुसरा जुलुस है और रथ पर सवार
एक बहोत महिमाशाली व्यक्ति है। वह पूछता है क्या ये ही भगवान है ?
किसी ने कहा नही, ये भगवान नही,
यह राम है और राम के मानने वाले लोग।
और क्राइस्ट और बुद्ध और महावीर
और जरथुस्त्र और कंफ्यूशियश और न मालुन
कितने महिमाशाली लोग निकलते है और उनकी मानने वाले लोग निकलते है।
आधी रात बीत जाती है, फिर धीरे धीरे रास्ते में सन्नाटा हो जाता है ।
फिर यह आदमी सोचता है की अभी भगवान नही निकले।
वे कब निकलेंगे?
और जब लोग जाने के करीब हो गए है,
रास्ता उजड़ने लगा है, कोई रास्ते पर ध्यान नही दे रहा है,
तब तक एक बूढ़ा-सा आदमी अकेले चला आ रहा है।
उसके साथ कोई भी नही है।
वह हैरान होता है की ये महाशय कौन है ?
जिनके साथ कोई भी नही । यह अपने आप ही घोड़े पर बैठकर
चले आ रहे है, बिलकुल अकेले। तो ये चलता हुआ आदमी केहता है की
हो न हो, यह भगवान होंगे । क्यों की भगवान से अकेला
और दुनिया में कोई भी नही है ।
वह जाकर भगवान को ही पूछता है उस घोड़े पर बैठे हुवे बूढ़े आदमी से
की महाशय आप भगवान है ? में बहुत हैरान हूँ,
मोहम्मद के साथ बहुत लोग थे, क्राइष्ट के साथ बहुत लोग थे,
राम के साथ बहुत लोग थे, सबके साथ बहुत बहुत लोग थे,
आपके साथ कोई भी नही?
भगवान की आँखों से आसूं गिरने लगे और भगवान ने कहा ,
सारे लोग उन्ही के बिच बंट गए है, कोई बचा ही नही जो मेरे साथ हो सके।
कोई राम के साथ, कोई कृष्ण के साथ,
मेरे साथ तो कोई भी नहीं। और मेरे साथ वही हो,
में अकेला ही हूँ !
घबराहट में उस फकीर की नींद खुल गयी।
नींद खुल गयी तो पाया वह जमीन पर अपने झोंपड़े में है।
वह पास पड़ोस में जाकर केहने लगा
की मैंने एक बहुत दुखद स्वप्न देखा है,
बिलकुल झूठा स्वप्न देखा है।
मैंने यह देखा की भगवान अकेला है ।
यह कैसे हो सकता है? वह फकीर मुझे भी मिला और
मैंने उससे कहा की तुमने सच्चा ही स्वप्न देखा है।
भगवान से ज्यादा अकेला कोई भी नही।
क्यों की जो हिन्दू हो सकता है वह भगवान के साथ नही हो सकता।
जो मुसलमान है वह भगवान के साथ नही हो सकता है।
जो जैन है वह भगवान के साथ नही हो सकता है।
जो कोई भी नही है, जिसका कोई विशेषण नही है,
जो किसी का अनुयायी नही है, जो किसी का शिष्य नही है,
जो बिलकुल अकेला है, जो बिलकुल नितान्त अकेला है
वही केवल उस नितान्त अकेले से जुड़ सकता है,
जो भगवान है।
अकेले में, तन्हाईमैं, लोनलिनैस में,
बिलकुल अकेले में वह द्वार खुलता है
जो भगवान से जोड़ता है ।
भीड़ भाड़ से भगवान का कोई संबंध नही।
!! ओशो !!
[ नेति नेति : 9 ]

मूलबंध : एक सरल प्रयोग

मूलबंध : एक सरल प्रयोग
एक छोटा सा प्रयोग, जब भी तुम्हारे मन में कामवासना उठे तो करो। तो धीरे - धीरे तुम्हें राह साफ हो जाएगी। जब भी तुम्ह़े़ं लगे कामवासना तुम्हें पकड़ रही है, तब डरो मत। शांत होकर बैठ जाओ। जोर से श्वास को बाहर फेंको -- उच्छवास। भीतर मत लो श्वास को - क्योंकि जैसे भी तुम भीतर गहरी श्वास को लोगे, भीतर जाती श्वास काम - ऊर्जा को नीचे की तरफ धकाती है।
जब भी तुम्हें कामवासना पकड़े, तब एक्सहेल करो, बाहर फेंको श्वास को। नाभि को भीतर खींचो, पेट को भीतर लो और श्वास को बाहर फेंको।... जितनी फेंक सको। धीरे - धीरे अभ्यास होने पर तुम संपूर्ण रूप से श्वास को बाहर फेंकने में सफल हो जाओगे।
जब सारी श्वास बाहर फिंक जाती है, तो तुम्हारा पेट और नाभि वैक्युम हो जाते है, शून्य हो जाते है। और जहां कहीं शून्य हो जाता है, वहां आसपास की ऊर्जा शून्य की तरफ प्रवाहित होने लगती है। शून्य खींचता है; क्योंकि प्रकृति शून्य को बरदाश्त नहीं करती, शून्य को भरती है। तुम्हारे नाभि के पास शून्य हो जाए, तो मुलाधार से ऊर्जा तत्क्षण नाभि की तरफ उठ जाती है। और तुम्हें बड़ा रस मिलेगा -- जब पहली दफा अनुभव करोगे कि एक गहन ऊर्जा बाण की तरह आकर नाभि में उठ गई। तुम पाओगे, सारा तन एक गहन स्वास्थ्य से भर गया। एक ताजगी! यह ताजगी वैसी ही होगी, ठीक वैसा ही अनुभव होगा ताजगी का, जैसा संभोग के बाद ऊदासी का होता है। जैसे ऊर्जा के स्खलन के बाद एक शिथिलता पकड़ लेती है।
संभोग के बाद जैसे विषाद का अनुभव होगा, वैसे ही अगर ऊर्जा नाभि की तरफ उठ जाए, तो तुम्हें हर्ष का अनुभव होगा। एक प्रफुल्लता घेर लेगी। ऊर्जा का रुपांतरण शुरू हुआ। तुम ज्यादा शक्तिशाली, ज्यादा सौमनस्यपूर्ण, ज्यादा उत्फुल्ल, सक्रिय, अन -थके, विश्रामपूर्ण मालूम पड़ोगे। जैसे गहरी निंद के बाद उठे हो। ताजगी आ गई।
यह मुलबंध की सहजतम प्रक्रिया है कि तुम श्वास को बाहर फेंक दो। नाभि शून्य हो जाएगी, ऊर्जा उठेगी नाभि की तरफ, मुलबंध का द्वार अपने आप बंद हो जाएगा। लह.द्वार खुलता है ऊर्जा के धक्के से। जब ऊर्जा मुलाधार में नहीं रह जाती, धक्का नहीं पड़ता, द्वार बंद हो जाता है।
इसे अगर तुम निरंतर करते रहे, अगर इसे तुमने एक सतत साधना बना ली -- और इसका कोई पता किसी को नहीं चलता;
तुम इसे बाजार में खड़े हुए कर सकते हो, किसी को पता भी नहीं चलेगा; तुम दुकान पर बैठे हुए कर सकते हो, किसी को पता नहीं चलेगा। अगर एक व्यक्ति दिन में कम से कम तीन सौ बार, क्षण भर कै मूलबंध लगा ले, कुछ महिनों बाद पाएगा, कामवासना तिरोहित हो गई। काम - ऊर्जा रह गई, वासना तिरोहित हो गई।
ओशो,
ध्यान विज्ञान.

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