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Saturday, 25 November 2017

सपने नही कर्म से सफलता मिलती है

                                


एक पहाड़ी पर प्रसिद्ध देवी का मन्दिर था लगभग 15 किलोमिटर की पैदल चढ़ाई थी। नीचे एक दुकान थी । जहाँ  पूजा-पाठ का समान व यात्रीयो के आवश्यकता की वस्तुये मिलती था। जो उस दुकान का मालिक था कभी मन्दिर नही गया था। वह यात्रियों  से ही वहा की सुन्दरता की तारीफ सुनता था। और सोचता था, हमारे तो यह मन्दिर पास ही है कभी भी चले जायेगे ।

 धीरे-धीरे समय निकलता गया।


   उसे  बुढ़ापा आ गया उसने सोचा अब तो जीवन का अन्त नजदीक है अब तो मन्दिर की यात्रा की जाये। उसने सब तैयारी की । रात्रि मे यात्रा करते थे जिससे सुबह आरती के समय दर्शन हो जाये उसने एक लालटेन ली, और अपनी यात्रा शुरु की, अभी वह कुछ ही दुर चला था। उसके मन मे विचार आया उसकी लालटेन की रोशनी सिर्फ चार कदम तक ही साथ दे रही थी और मुझे 15किलोमिटर की लम्बी यात्रा तय करनी है । इस लालटेन के भरोसे यह कैसे तय होगी वह वही बैठ गया और सोचने लगा



जैसे जैसे उम्र बढ़ती है। होसला भी कम होता चला जाता है। वह निराश होकर बैठा हुआ सोच रहा था तभी एक यात्री उसके पास आकर उससे बोला- “कैसे बैठे हो”



वह बोला – ‘मै सोच रहा था 15किलोमिटर का रस्ता कैसे तय होगा ? मेरी लालटेन से तो सिर्फ चार कदम की रोशनी हो रही है।“



वह यात्री बोला-“मेरी लालटेन तो तुमसे भी छोटी है। इससे तो सिर्फ तीन कदम की ही रोशनी होती  है।



तुम्हारी तो फिर भी चार कदम दिखाती है। तुम एक कदम बढ़ाओगे तो चार कदम की रोशनी तुम्हे बराबर मिलती रहेगी कभी कम नही होगी तुमारी मंजिल तक चार कदम रोशनी तुम्हारे आगे बनी रहेगी हिम्मत करो और चलो, प्रकाश तुम्हारे आगे चलता रहेगा।



यही हम करते है आज का काम कल पर टालते रहते है जब समय कम रह जाता है तब अपनी यात्रा शुरु करते है समय कम यात्रा लम्बी घबराकर जाते है   सारा समय सपने देखते मे निकल जाता है। और जब भी उन्हे करने का प्रयास करते है निराश होकर बैठ जाते है। क्योकि यात्रा लम्बी है रोशनी कम है। अगर हम दो कदम बढ़ाते है तो रोशनी भी दो कदम आगे बढ़ती है। सपने देखने कोई बुरी बात नंही है। मगर सपने सोते हुये देखे जाते है। सपना देखा बात खत्म, अब आप जग गये अपने कर्म पर ध्यान दो आपको अपने वर्तमान पर ध्यान देना है अपना 100% वर्तमान पर लगा देना है, न की अपने सपनो पर, जो सिर्फ सपने देखते रहते है वे हमेशा सोये रहते है। और जो सोया हुआ है वह जीवन मे कुछ नंही कर सकता, सोचता रहेगा और सपने देखता रहेगा, मंजिल तक वही पहुचता है जो जग गया।



यह जीवन बहुत खूबसूरत  है। भविष्य के लिये वर्त्मान को खराब मत करो अधिकांशेत भविष्य को सुखद बनाने के लिये अपने वर्तमान को दुखद बना देते है। जबकि सच्चाई यह है भविष्य कभी आता ही नही आप वर्तमान मे रहते हो, आप अभी हो, इसी क्षण हो, जो भी आपको देना है अभी अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। अगर आप वर्तमान मे सर्वश्रेष्ठ देना सिख गये तो भविष्य तो आपका अपने आप स्वर्णिम हो जायेगा, यह जीवन वही जीते है जो आज मे जीते है।



 रोहित ने 10th  मै सपना देखा मुझे डाक्टर बनना है उसने 11th  मै PCB लिया, बात खत्म हो गयी उसने सपने देखा, जग गया, अब उसका ध्यान 11th  मै हो वल्कि वर्तमान मे है PCB मै है जो चेप्टर वह आज पढ़ रहा है सिर्फ उसमे है उसे उसमे अपना 100% देना है। कल के बारे मे नही सोचना, मुझे डाक्टर बनना है, नही  इसके वह सपने नंही देखता, सपने देखने के लिये सोना पडता है मगर वह जागा हुआ है। जो जागते हुये सपने देखते है वह जागे हुये नही है वह जागते हुये  सोये हुये के समान है जो भी करना है आज करना है अभी करना है वर्तमान ही जीवन है।



मगर कहने मे ये जीतना आसान लगता है, है नही, जगना प्रत्येक कार्य जगे हुये करना ये हम कैसे करे
ध्यान  से  करे,  ध्यान  लगाये
 मगर  कैसे ?
कहते सब है मगर ये कोई नही बताता

 ध्यान कैसे लगाये ? ध्यान लगाये बीना अपना 100% नही दे सकते हम कोई भी कार्य कर रहे है विचार कोई और चल रहा है और इसी को जागते हुए सोना कहा जाता है । जागना मतलब एक समय मे आप जो भी कार्य कर रहे है सिर्फ वही कर रहे है उसको आपने 100% दे दिया आप खाना खा रहे है तो सिर्फ खाना खा रहे है पानी पी रहे है तो सिर्फ पानी पी रहे है यह तभी सम्भव है जब आपके पास उस कार्य के अलावा दुसरा कोई विचार न आये
यह सब आता है ध्यान करने से, ध्यान का मतलब होता है अन्दर की सफाई




योगा कसरत आदि से हम सिर्फ बाहरी शरीर को स्वस्थ कर पाते है मगर ध्यान करने से हम अन्दर से स्वस्थ होते है अन्दर का कचरा साफ करते है जो फालतू के विचार हो वह निकलते है आप घर के अन्दर की सफाई करते है तो  कचरा उठाकर बहार फेकते है एसे ही जब हम ध्यान करते है तो अन्दर का कचरा जो किसी भी रूप मे है बहार फेक देते है सारे दिन न जाने कितने नकरात्मक सकरात्मक विचार हमारे मस्तिष्क मे आते है उनका सफाई करना आवश्यक है फिर हम जो भी कार्य करते है उसको100% दे पाते है प्रत्येक काम ध्यान से जगे हुए करते है ।  




Saturday, 5 August 2017

असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।

                       

   
शेर हमला करने से पहले अपने कदम पीछे हटाता है। जब कोई  बिल्डिंग आप देखते है चाहे वह दस मंजिला हो, बीस हो, पचास हो या एक मंजिला ही क्यो न हो, शुरुआत हमेशा जमीन से नीचे की ओर से होती है जमीन से नीचे जाए बीना आप एक मंजिला इमारत भी खड़ी नही कर सकते जितनी मजबूती से नीचे का कार्य होगा उतनी ही ऊपर की इमारत मजबूत होगी
 अगर डाक्टर बनना हो तो कम से कम पाँच साल लगते है इंजीनियर बनना हो तो चार साल लगते है
हम जब भी कोई काम शुरू करते है चाहे वह व्यापार हो अभिनय का क्षेत्र हो खिलाड़ी हो या कोई भी क्षेत्र हो, शुरुआत मे सफलता नही मिलती पहले नीचे की ओर, वरन असफलता झेलनी पड़ती है जितने भी सफल व्यक्ति है सब शुरुआत मे असफल हुए, आप किसी भी सफल व्यक्ति या महापुरुष का इतिहास उठाकर देख सकते हो ।
 शुरुआत मे सब नीचे की ओर गये फिर इमारत बननी शुरु हुयी ।
इसको आप प्रकृति का नियम भी कह सकते हो ।
शुरुआत मे नीचे की ओर जाते है जो घबरा गया या टूट गया उसका इस दुनिया मे कोई अस्तित्व नही रहता ।
और जो नीचे जा कर भी हिम्मत नही हारता वह दुगने जोश के साथ ऊपर उठता है ओर अपनी हार को जीत मे बदलता है जब भी हम कोई काम शुरु करते है तो कम से कम चार पाँच साल सिखने के होते है इन शुरुआती सालो मे ज्यादा आय की आशा न रखे अगर आप का ख्रर्चा भी निकलता रहे तो वह  बहुत बड़ी बात होगी । हमे सिर्फ अपने कर्म पर ध्यान देना है ।
मि, रमेश को अभिनय का शोक था उसने अभिनय को ही कैरियर बनाने की सोची उसने अच्छे अभिनय स्कूल से अभिनय का कोर्स किया उसके बाद कई थ्येटर किए छः माह तक उसे कोई काम नही मिला हिम्मत हार कर। वह वापस आ गया
 शाहरुख खान आज एक प्रसिद्ध अभिनेता है सुपर स्टार है जब वह दिल्ली से मुम्बई आये थे तो पाँच साल तक कोई काम नही मिला ।पाँच साल की खाक छानने के बाद फौजी सीरियल मे काम मिला । उसके बाद एक और सीरियल सर्कस मे काम करने का मौका मिला उसी दौरान उसे फिल्म दिवाना मिली । फिर उसने मुड़ कर नही देखा ।
 शुरुआत मे पाँच साल तक मुम्बई की गलियों मे धक्के खाते रहे अगर वह एक साल या दो साल मे हिम्मत हार जाता तो वह आज सुपरस्टार नही होता । उन शुरुआती पाँच साल जो उसके संघर्ष के थे वह नीचे की और जा रहा था दिन प्रतिदिन नींव मजबूत हो रही थी जब उसने ऊपर की और जाना शुरु किया तो नीचे की और झांककर  भी नही देखा आज वह सुपरस्टार है ।
 सफल और असफल लोगो मे यही अन्तर होता है असफल लोगो मे लड़ने की क्षमता नही होती उनकी विल पावर बहुत कम होती है जो सफल हुए है वह जब तक सफल नही हो जाते उनकी विल पावर दिन प्रतिदिन मजबूत होती चली जाती है वह अपने को सफल व्यक्ति की श्रेणी मे रखकर ही दम लेता है।
 यह दुनिया नकारात्मक लोगो से भरी हुयी है जिस प्रकार जंगल मे शेर बहुत कम होते है इसी प्रकार सफल लोग भी इस दुनिया मे बहुत कम है ।
 अधिकांशतः लोग असफल लोगो को ही देखते है उनसे अपनी तुलना करते है इसी कारण से वह ऊपर नही उठ पाते ।
 यह एक सृष्टि का नियम है जितना मांगोगे उससे कम ही मिलेगा
कोई बीस हजार रुपये महीने की आय का सपना देखता है तो वह बीस से नीचे ही रहेगा या उसके समकक्ष
कोई एक लाख का, तो कोई करोड़ का सपना देखता है तो वहा तक अवश्य पहुचेगा ।
 जैसा सोचोगे वैसा बनोगे
बड़ा सोचोगे तो बड़ा मिलने की सम्भावना बनी रहेगी ।
एक प्रोफेसर ने क्लास मे छात्रो से पूछा –“यहा से निकलने के बाद आप मे से कुछ नौकरी करेंगे कुछ व्यापार करेंगे । आपको कितने का वार्षिक पैकेज चाहिए जिससे आप संतुष्ट हो सके और सुखी जीवन जी सके ।
 कुछ ने चार लाख। कुछ ने छः लाख, कुछ ने दस, कुछ ने बीस लाख,
 सब ने अपने हिसाब से कुछ न कुछ बताया । पुरी क्लास मे एक छात्र एसा था जो कुछ नही बोला
प्रोफेसर ने उससे पूछा – तुमने कुछ नही बताया
उस छात्र ने कहा – सर जो मुझे चाहिए वह मै नम्बर्स मे नही बता सकता ।
प्रोफेसर ने आश्चर्य से पूछा –“ फिर कैसे बताना चाहते हो ।
सारी क्लास के छात्र भी उसे ही देख रहे थे ।
“सर इसके लिए हमे क्लासरुम से बहार जाना होगा ।
प्रोफेसर ने उसकी बात मान ली वह सब छात्रो के साथ बहार आ गये
वह छात्र अपने दोनो हाथो को पास लाया और बोला – मुझे इतना नही चाहिए “
फिर अपने दोनो हाथो को खोलता गया –“मुझे इतना भी नही चाहिए “
 फिर दोनो हाथो को आसमान की और फैलाते हुए बोला- जितना आसमान दिखता है मुझे उससे भी ज्यादा चाहिए ।

                 
 यह बोलते समय उसके आँखो मे एक अलग सी चमक थी ।
 प्रोफेसर ने ताली बजायी फिर सभी क्लासरुम मे आगये ।
 उन्होने कहा-यह लड़का एक दिन इतनी ऊचाईया छुएगा जहाँ नम्बर्स मायने नही रखते ।
 जो लोग सिर्फ कर्म को महत्व देते है वे नम्बर्स के गेम मे नही उलझते ।
 अमीताभ बच्चन शाहरुख खान मुकेश अंबानी आदि एसे लोग है जिनके पास इतना पैसा है पुरी जिन्दगी एशो अराम से काट सकते है ।उन्हे काम करने की कोई आवश्यकता ही नही है ।
अमिताभ बच्चन इस उम्र मे भी आज कितनी मेहनत करते है। उनके लिए नम्बर्स नही, कर्म महत्वपूर्ण है एसा करने मे उन्हे आन्नद की अनुभूति होती है प्रतिदिन एक नई उर्जा के साथ  उठते है और अपने कर्म के प्रति ईमानदार है ये कभी नही सोचते हमारे पास बेहिसाब दौलत है हमे काम करने की क्या जरुरत है या एक दिन काम नही करेगे तो क्या फर्क पड़ता है ?
 एसा सिर्फ आलसी और असफल लोग ही सोचते है और हमेशा दुखी और तनाव भरा जीवन जीते है ।
 इतने बड़े मुकाम पर पहुचने के बाद एसा नही है इनको असफलता नही मिलती शाहरुख खान की सारी फिल्मे हिट नही होती एक समया एसा भी आया अमिताभ बच्चन की फिल्मे एक के बाद एक फ्लाप हो रही  थी । मगर वह अपने कर्म के क्षेत्र मे अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहे ।
 असफलता का अफसोस नही होता बल्कि अगली बड़ी सफलता का प्लेटफार्म तैयार होता है अगर हम अपना सौ प्रतिशत देने को तैयार है तो सफलता असफलता मायने नही रखती ।
हमे यह सन्तुष्टी रहती है हमने अपना सौ प्रतिशत दे दिया आगे परमात्मा की मर्जी ।
 कभी असफलता से विचलित न हो, न ही सफलता से अतिउत्साहित हो । दोनो ही परिस्थितियों मे सम रहना है  दोनो ही परिस्थितियों मे आपके आन्नद मे हलचल नही होनी चाहिए ।
 आप सिर्फ कर्म करते चले जाओ अपना सौ प्रतिशत देते चले जाओ बाकी सब परमात्मा पर छोड़ दो आपको सफल होने से कोई नही रोक सकता ।


     

Thursday, 15 June 2017

पैसा कमाने का आसान तरीका -सेवाभाव

                            

                    


सब पैसा चाहते है किसे पैसा नही चाहिए, पैसे के बिना इस संसार मे कुछ है भी नही,

धन दौलत इकटठी की जाए , खुब पैसा हमारे पास हो ।

यह एक अच्छी सोच है पैसो से ही आप स्वयं व आपका परिवार मनचाही जिन्दगी जी सकता है आपके जीवान की

 आवश्यकता की वस्तुए पैसे से ही खरीदी जा सकती है पैसो से ही आप गरीब व जरुरतमंद लोगो की मदद कर सकते 

हो अगर आपके पास पैसा है तभी आप अपने परिवार के साथ साल मे एक या दो बार पर्यटक स्थल पर घूमने जा सकते

 हो । धन एक वह साधन है जिसके माध्यम से जीवन का भरपूर आन्नद उठा सकते हो ।

  इस संसार मे परमात्मा द्वारा दिये गये साधनो मे से एक धन सबसे महत्वपूर्ण साधन है ।

 अक्सर हमे धार्मिक गुरुओ द्वारा यह सुनने को मिलता है धन समपत्ति सब माया है सब बेकार है एक दिन छूट ही

 जाना है फिर इसके पीछे क्यो भागे । कोई भी आश्रम मन्दिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा आदि सब माया से ही बनते है 

सतसंग पूजा बीना माया के नही होता । यह जीवन चलाने के लिए भी माया की आवश्यकता होती है बिना माया के इस

 संसार मे कुछ भी संभव नही ।

  जो लोग यह कहते है हमे पैसा नही चाहिए

 हम तो गरीब है

 पैसो का क्या करना है ?

उपरोक्त शब्द वही बोलते है जिनके अन्दर आगे बढने की ललक नही होती आलसी होते है हमेशा गरीबी का रोना रोते 

रहते है ।

या उन्हे पैसा कमाने का मौका नही मिला । पैसा तो कमाना चाहते है मगर पैसा कमाने का तरीका नही जानते ।

 सच्चाई यही है पैसा सब चाहते है मगर अधिकांशत पैसा उल्टे ढंग से कमाते है ।

पैसा कमाने के लिर पैसो का पेड़ बोना पड़ता है ।

सेवाभाव पैसो का बीज है आप अपने अन्दर सेवाभाव लाइये पैसो का पेड़ लग जायेगा ।

मगर अधिकांशतः लोगो का लक्ष्य पहले पैसा होता है और वे पैसो के दिवाने हो जाते है एसे लोगो के पास पैसा कम

 आता है पूरी जिन्दगी पैसा पैसा करते हुए बीत जाती है ।

कुछ लोगो के पास पैसा आ भी जाता है तो वे पैसो के इतने दीवाने हो जाते है वे अपनी आवश्यकता के लिए भी पैसा

खर्च नही कर पाते । सिर्फ संग्रह करते चले जाते है ।

 धन परमात्मा का वह साधन है जिसके द्वारा आप अपनी जिन्दगी आन्नद से गुजार सकते हो और दूसरो की मदद भी

 कर सकते हो देश विदेश का भ्रमण भी कर सकते हो आप अपने परिवार समाज देश की तरक्की मे सहयोग कर सकते 

हो ।

पैसा कमाने का लक्ष्य एक अच्छी सोच है मगर अपने अन्दर सेवाभाव विकसित कीजिए पैसो का बीज ही सेवाभाव है ।

 पहले  सेवाभाव यह पैसा कमाने का सीधा सरल रास्ता है।

 पहले पैसा यह पैसा कमाने का उल्टा रास्ता है आप किसी रेस्त्रा मे खाना खाने जाते है वहा वेटर आपकी सेवा मे 

उपस्थित होता है  मेज पर कपड़ा मारता है आपको पानी देता है उसके बाद आपसे आर्डर लेता है जितना समय खाना

 आन्रे मे लगता है आपको जलजीरा पेश करता है जलजीरे के गिलास ले जाता है मेज पर कपड़ा मारता है । फिर खाना

 लगाता है । बराबर आपकी सेवा मे उपस्थित रहता है ।

 वह हमेशा अच्छी टिप लेता रहेगा ।

          पहले सेवा फिर मेवा

एक बार मै और मेरी पत्नी लेडीज कपड़ो के शोरुम पर गये । सेल्संमैन ने शूट दिखाने शुरु किए शूट सब अच्छे थे मगर

 हमारे बजत से बहार थे वह काफी महंगा शोरुम था हमे पसन्द आने के बावजूद भी हम नापसन्द      करते रहे । वह

 मुस्कराते हुए एक के बाद एक शूट दिखाता रहा मगर सब हमारे बजट से बहार थे ।

अन्त मे हमने उससे कहा हमे पसन्द नही है हम उठकर जाने लगे ।

 तब सेल्समैन ने मुस्कराकर कहा –“कोई बात नही सर अगली बार आइये आपकी पसन्द के मुताबिक शूट अवश्य मिलेगा

 मै क्षमा चाहता हू मै आपकी पसन्द का शूट नही दिखा पाया ।“

 उसके यह शब्द मेरे दिल मे उतर गये उस सेल्समैन ने मेरे दिल मे जगह बना ली ।

 उसका मेरे ऊपर इतना प्रभाव पड़ा अगली बार से मै उसी के यहा से शूट खरीदता हू ।

कुछ सेल्समैन एसे होते है कुछ नही बल्कि ज्यादातर,

आपको समान दिखाते है आपको पसन्द न आने पर एक बुरा सा मुंह बनाते है कुछ तो अपशब्द भी बोल देते है ।

 जाने कहा कहा से परेशान करने आ जाते है

 न तो अपने समय का ख्याल है न दूस्ररे का

एसे लोगो की दूकान पर कोई मजबूरी मे ही जायेगा एसे लोगो का मकसद सिर्फ पैसा होता है मगर इनका पैसा कमाने

 का तरीका हमेशा उल्टा होता है एसे लोग कभी स्वयं भी खुश नही रहते । वे चिड़चिड़े और झगड़ालु प्रवृति के होते है

 जितनी उनमे क्षमता होती है उससे काफी कम ये पैसा अर्जित करते है इनके दिमाग मे हमेशा पैसा ही चलता रहता है

 एसे लोग पैसो के साधन का मजा नही ले पाते बल्कि पैसा ही इनके लिए सब कुछ हो जाता है ।

दो दोस्तो का एक ही कम्पनी मे नौकरी लगी दोनो की एक ही पोस्ट थी समान वेतन था ।

अगले पाँच सालो मे मि अ का वेतन मि ब के वेतन से पाँच गुना ज्यादा हो गया ।

 मि अ ने कम्पनी को अपनी कम्पनी समझ कर काम किया हर वह काम किया जिससे कम्पनी को फायदा पहुचे और

 उसकी बढोतरी हो ।

 जबकी मि ब ने उतना ही काम किया जितना उनका काम था काम किया बात खत्म हो गयी पैसे तो इतने ही मिलने

 है 

मि अ के दिमाग मे सिर्फ एक ही बात चलती थी किस तरह से कम्पनी को आगे बढाया जाए अपना काम तो वे करते

 ही थे वरन यह भी सोचते थे कम्पनी को आगे कैसे बढाया जाए ।

 इसलिए वह नया काम भी सीखते गये । कम्पनी को भी फायदा हुआ और उन्हे भी ।

 मि ब जैसे लोग जिन्हे सिर्फ पैसो से मतलब होता है जीवन मे ज्यादा तरक्की नही कर पाते है वह पाँच साल बाद भी 

वही के वही रहे आगे भी एसे लोगो की तरक्की नही होने वाली ।

 मि अ जैसे लोग अपने सेवाभाव वाले भाव के कारण काफी ऊचाईयो तक पहुँचते है ।

 सेवाभाव ही ज्यादा पैसा कमाने का बीज है अगर आप जिन्दगी मे आगे बढ़ना चाहते है तो अपने अन्दर सेवाभाव पैदा

 कीजिए ।

 दूसरो की हमेशा मदद करो

 अपने अन्दर उत्साह पैदा करो


 रुको मत जीवन मे आगे बढो ।

Wednesday, 17 May 2017

How To Be Successful In Life


           


'महंगाई बहुत है'   
'महंगाई के कारण पुरे महीने का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है'
'हे भगवान आज के इस महंगाई के दौर मे बच्चो को शिक्षित करना कितना मुश्किल होता जा रहा है'
उपरोक्त वाक्य हमे अक्सर सुनने को मिलते है
कभी आपने सोचा है ये कौन लोग बोलते है ?
गरीबी की रेखा मे रहने वाले लोग,
उससे थोड़ा ऊपर जिसे हम औसत कह सकते है
 निम्न मध्यवर्गीय कह सकते है
 ये सब अपने जीवन मे असफल लोग है जो सिर्फ अपना जीवन काट रहे है और किसी न किसी से चोट खाये होते है या कुछ करना तो चाहते थे मगर असफल हो गये, गिर पड़े,
उठे और दुसरी दिशा मे घिसटते हुए चल दिये यही वह लोग है जो हमेशा रोते रहते है
महंगाई बहुत है
कुछ ही चन्द लोग एसे है जिन्हे कभी महंगाई नही लगती अपनी आवश्यकता के अनुसार बड़े मजे से खर्चा करते है सही मे अगर जिन्दगी का मजा ले रहे है तो यही वह चन्द लोग है जिन्हे  हम सफल लोगो की श्रेणी मे रख सकते है ।
सफल व्यक्ति उसे कहा जा सकता है जिसे उसकी आवश्यकता की वस्तुए सस्ती लगने लगे ।
तीन तरह के लोग इस दुनिया मे पाये जाते है
गरीब, औसत और सफल
गरीब व्यक्ति इस लिए गरीब है वह अपने को गरीब मानता है वह हारा हुआ इन्सान है उसने गरीबी को अपनी तकदीर मान लिया है कभी उसने अपने को ऊपर उठने का प्रयास ही नही किया और सबसे ज्यादा शारीरिक मेहनत भी यही करता है । दिन मे कई बार यह अपने को याद दिलाता है वह गरीब है वह हमेशा परेशान रहता है तनाव मे रहता है उससे अगर आप बात करे तो आपको वह इतने दुख गिना देता है
‘मै जीवन मे बहुत कुछ कर सकता था मगर मुझे उसने धोखा दे दिया’
‘मेरी तो बीमारी ही जाने का नाम नही लेती’
आदि न जाने कितने दुखो के भवर मे फंसा है
इन सब तनाव को कम करने के लिए वह शराब का सहारा लेता है गरीब आदमी सबसे ज्यादा शराब पीता है और बच्चे पैदा करता है इससे वह कुछ समय के लिए अपने दुख भूल जाता है ।
औसत आदमी जीवन मे बहुत कुछ करना चाहता है मगर असफल हुआ,
गिरकर किसी तरह से उठा मगर फिर से न गिर जाऊ संभलकर चलने लगा जो कुछ मेरे पास है वह खो न जाए या कम न हो जाए उसकी सारी ऊर्जा उसमे ही लगी रहती है वह हमेशा इसी गुणा भाग मे लगा रहता है किस तरह खर्चा कम हो या कहा से पैसे बचाए जा सकते है ।
जबकि सफल व्यक्ति यह नही सोचता खर्चा कैसे कम हो बल्कि वह चिन्तन करता है कैसे अपनी आय बढाई जाए ।
 अब  बात करते है उन चन्द सफल लोगो की
सफल लोगो मे एक बात देखने मे आती है ये प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते है चाहे उधोगपति हो बड़े व्यापारी हो मन्त्री हो खिलाड़ी हो या किसी भी क्षेत्र मे सफलता हासिल की हो इसमे आपको गरीब निम्न उच्च मध्यमवर्गीय अमीर प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व मिलेगा ।
सफल, औसत और गरीबी की दलदल मे फंसे लोगो मे क्या अन्तर है ? जो चन्द सफल लोग है ये भी असफल हुए मगर हारे नही अपनी असफलता से बहुत कुछ सीखा ।
गिरे उठे और फिर दौगने जोश के साथ चल दिए और अपने गिरने के कारणो की समिक्षा की और आगे बढे
फिर गिरे
 उठे
फिर चौगने जोश के साथ अपने गिरने के कारणो की समिक्षा की और आगे बढे । अपनी असफलता से निराश नही हुए उससे सिखते हुए आगे बढते गये ।
 जितने भी सफल लोग है चाहे खिलाड़ी हो एकटर हो उधोगपति आदि  सभी कितनी बार असफल हुए है उनमे और औसत लोगो मे सिर्फ एक ही फर्क रहा है औसत असफल होने के बाद उठ नही पाये,
 उठे भी तो अपनी दिशा बदल ली सफल लोग असफलता से निराश नही हुए बल्कि उसे सिखने का माध्यम बनाया असफलता ही उनकी सफलता की प्रेरणा बनी ।
 जब किसी देश की क्रिकेट टीम मैच हारती है तो उसके हारने के कारणो की समीक्षा की जाती है अब तो टीम कोच मैच की विडियो बनवाते है और हारने के कारणो को खिलाड़ियो के साथ देखते है और उसकी समीक्षा करते है जो गलतियॉ उस मैच मे की थी अगले मैच मे उन गलतियो को सुधारते हुए पुरे जोश के साथ मैच खेलते है ।
 असफलता सिर्फ सिखने के लिए होती है जो सिखता है वही हार को जीत मे बदलता है ।
हार को जीत मे बदलने वाला ही सफलता के शिखर पर पहुचता है अगर हमारे अन्दर सिखने का जज्बा है तो असफलता भी हमारे लिए फायदे का सौदा हो सकती है
 मगर यह मनुष्य भी अजीब है जब यह जीतता है तो उसका श्रेय स्वय लेना चाहता है लोगो से सुनना चाहता है
मगर इसके विपरीत जब असफल होता है तो वह दोष दूसरो पर मढ़ना चाहता है ।
उसने मेरे साथ एसा किया इसलिये मुझे नुकसान उठाना पढा या उसके कारण आगे नही बढ पाया ।
 सफल व्यक्ति कभी दूसरो पर आरोप नही लगाता बल्कि अपनी प्रत्येक
असफलता को सकरात्मक दृष्टि से देखता है और उससे कुछ न कुछ अवश्य सिखता है ।
 औसत असफल व्यक्ति हमेशा अपनी कमिया छिपाता है और अपनी असफलता का दोष दूसरो पर मढता है ।
  ‘मै यह करना चाहता था मगर मेरे मां –बाप ने नही करने दिया ‘
इस तरह के डायलॉग हमे अक्सर सुनने को मिलते है
एसे लोगो से एक सवाल पूछे –
क्या सारे काम आपने मां –बाप की मर्जी से किये है फिल्मे देखना मोबाइल पर व्हाटसैप फेसबुक पर घंटो बैठे रहना यू टयूब पर विडियो देखना दोस्तो के साथ मस्ती करना , अगर यह सब काम आपने अपने मां –बाप की मर्जी के खिलाफ किए है
फिर वह एक काम जिसमे आपको लगता है आप बहुत कुछ कर सकते है मां –बाप की मर्जी के विरुध क्यो नही कर सकते ।
 यह सब बहानेबाजी है डर हमारे अपने अन्दर होता है हम अपने कमफर्ट जोन को छोड़ना नही चाहते और अपनी असफलता का आरोप दूसरो पर लगाते रहते है
सफल और असफल लोगो मे सबसे बड़ा फर्क यही होता है सफल लोग अपनी असफलता की जिम्म्रेदारी स्वयं लेते है और उससे कुछ  सिखते है और फिर पूरे जोश से आगे बढते है । असफल लोग असफल होने पर दोष दूसरो पर मढते है उस असफलता से सिखना तो दूर आगे बढने का होसला भी खो देते है ।
 असफलता ही सफलता की सीढी होती है जितने भी सफल लोग हुए है कितनी बार असफल हुए मगर असफलता से निराश नही हुए बल्कि उस असफलता को आगे बढने का माध्यम बनाया ।

थोमस एडिसन, kfc के मालिक कर्नल सैडर्स, निरमा कम्पनी के मालिक कर्सन भाई पटेल, सन्दीप महेश्वरी आदि एसे नाम है जो बार बार असफल हुए मगर हिम्मत नही हारी और एक दिन अपनी नजरो मे दुनिया की नजरो मे सफल कहलाए ।   

Sunday, 19 March 2017

आकर्षण का सिधान्त क्या है (law of attraction)


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आकर्षण का सिधान्त क्या है (law of attraction) क्या ये वास्तव मे काम करता है ? क्या जैसा हम सोचते है वैसा ही हम बनते है ?


   एक छोटा बच्चा खेल खेल मे डाक्टर के कपड़े पहनता है और डाक्टर की तरह ही व्यवहार करता है । वह भूल जाता है वह बच्चा है वह अपने को उस समय डाक्टर ही समझता है उसके अचेतन मन मे यह बात बैठ जाती है वह डाक्टर है ।


 बड़े होकर वह डाक्टर बनता है।

कोई बच्चा खेल-खेल मे फौजियों के कपड़े पहनता है अपने को एक सैनिक समझता है बड़े होकर वह सैनिक बनता है ।


एसा होता है जो बच्चे खेल खेल मे करते है वही बड़े होकर बन जाते है
जो बचपन से सोचा, वही बने ।

जैसा हम अपने बारे मे सोचते है  अपने बारे मे  विचार बनायेगे वैसा ही हम बनते चले जायेगे, दूसरे लोग भी हममे वही देखते है जो हम अपने आप मे देखते है वैसा ही हमे व्यवहार मिलता है जिसके काबिल हम होते है ।


 सारा फर्क सोच का है किसी व्यक्ति के पास कितनी भी योग्यता क्यो न हो
 उसके मन मे अगर यह धारणा बैठी हुयी है की मै इस काम को नही कर सकता या मुझ से ये काम नही हो सकता तो वह उस काम को कभी नही कर पायेगा ।


 दूसरी तरफ मि श्याम यह सोचते है वह कोई काम कर सकते है तो वास्तव मे वह उस काम को कर लेगे ।

श्याम अपने आप को एक महत्वपुर्ण व्यक्ति समझते है जब तक आप अपने आप को महत्व नही देगे दूसरे भी आप को महत्व नही देगे ।

आप क्या सोचते है इससे तय होता है आप कैसा काम करते है । आप क्या करते है इससे तय होता है दूसरे आपके साथ कैसा व्यवहार करते है ।

  जैसा हम सोचते है वैसा हम बनते है

इस पूरे सृष्टि को एक विश्व शक्ति संचालित करती है जिसे हम अलग अलग नामो से कुछ भी कह सकते है भगवान, अल्लाह, वाहे गुरु, गोड
इस विश्व शक्ति से हम सब जुड़े हुए है इसका काम है देना जो भी हम मागते है उसे देना ।

 आप बस से देहली जा हो आपने बस संचालक से देहली का टिकट माँगा  तो उसने आपको देहली का टिकट दे दिया

इसका दूसरा पक्ष देखिए आपने उससे देहली का टिकट माँगा वह आपको टिकट दे ही रहा था आपने उससे कहा रुको मुझे देहली का नही मेरठ का चाहिए वह आपको मेरठ को टिकट देने ही जा रहा था आपने उससे कहा – मेरठ का टिक्ट रहने दो एसा करो मोहननगर का दे दो । वह मोहननगर का देने लगा तभी आपने उसको बोला एसा करो आप मुझे देहली का ही दे दो । बस संचालक ने अब क्या किया आपको बस ही नीचे उतार दिया पहले सोचले तेरे को जाना कहा है ।

  इस बात को जरा ध्यान से समझो

सारा खेल विचारो का है आप के अन्दर एक विचार आया मुझे ये चाहिए या मुझे ये बनना है आपकी ये इक्छा विश्वशक्ति के पास पहुच गयी  और वह आपको देने के लिए तैयार है मगर आपके पास दूसरा विचार आ गया तीसरा आ गया एक दिन मे हजारो विचार आते है और एक विचार पर न टिके रहने के कारण विश्वशक्ति से कुछ नही मिल पाता अगर हम एक विचार पर ही टिके रहे और हम संकल्प ले ले हमे तो सिर्फ यही चाहिए या हमे सिर्फ आइ ए एस आफिसर्स ही बनना है डाक्टर ही बनना है जो भी आप बनना चाहते हो बस उस एक विचार को पकड़े रहो उठते बैठते सोते जागते उस विचार के सपने देखो उस विचार को पकड़ कर जीओ  विश्वशक्ति वह सब अवश्य देगी

 जितनी आपकी संकलप शक्ति मजबूत होगी उतनी शीघ्रता से विश्वशक्ति आपकी इक्छा पूरी करने मे लग जाती है ।

  यह नकरात्मक और सकरात्मक दोनो मे काम करती है

कोई व्यक्ति अक्सर यह कहता है मै बीमार हू कई साल से बीमार चल रहा हू बीमारी जाने का नाम ही नही ले रही एसा व्यक्ति हमेशा बीमार रहेगा

 कोई कहे मेरे सिर मे दर्द हो रहा है तो उसके सिर मे दर्द बना रहेगा
गरीब आदमी हम्रेशा गरीब ही बना रहता है क्योकि वह अपने को गरीब मानता है दिन मे कितनी बार दोहराता है मै गरीब हू । जिनके पास धन होता भी है और वे कहते रहते है हमारे पास कुछ नही है हम तो गरीब है तो आपने देखा होगा उनके पास धन होते हुए भी वे गरीब से भी बदतर होते है विश्वशक्ति उनसे खर्च करने की शक्ति छिन लेती है । कई बार कुछ लोगो का पैसा एसे ही चला जाता है ।

 जैसे हमारे विचार बनते है वैसे ही हम बन जाते है । 

अब हम बात करते है आकर्षण का सिधान्त काम कैसे करता है?
आप जो भी बनना चाहते है उसके दिन रात सपने देखिए

मान लीजिए श्याम 12th का छात्र है उसने अपना गोल तय किया कि उसे 90% मार्क्स चाहिए वह दिन रात 90% के सपने देखता रहा जिस समय भी वह पढ़ने बैठता सपने देखने बैठ जाता और विचारो मे खो जाता पूरे साल सिर्फ सपने देखे पढ़ाई  नही की तो क्या उसके 90% मार्क्स आजायेगे ?

  नही-90% मार्कस तो क्या, वह फेल भी हो सकता है ।

राम ने भी 90% का गोल तय किया दिन रात एक ही विचार चलता रहता था 90% मार्कस

 उसने अपनी सब कापी किताबो पर लिख दिया 90%

जब भी वह पढ़ने बैठता उस गोल को देखता और पूरे जोश intrest के साथ पढ़ने बैठता अगर 90%लाने है तो पढ़ना है वह भी पूरे interest के साथ

और उसके 88% मार्कस आ जाते है
आकर्षण का सिधान्र्त काम करता है

कर्म और संकलप शक्ति के साथ

अब एक प्रशन उठता है हैं पाँच बच्चे एक competition के लिए बराबर मेहनत करते है सब की एक ही इक्छा है इस competition को clear करना

 मगर salection एक ही बच्चे का होता है वहा बाकी चार ने भी पूरी मेहनत से तैयारी की थी वह भी चाहते थे उनका salection हो, क्या वहाँ विश्वशक्ति ने काम नही किया ?

 उस एक मे और बाकी चार मे क्या फर्क रहा होगा ?

ओलम्पिक या एशियन गेम होते है उनमे कई देशो के खिलाड़ी  भाग लेते है सभी अपने अपने देशो के best होते है सभी वहा स्वर्ण जितना चाहते है मगर जो जीतता है और बाकी मे क्या अन्तर है सभी ने वहा अपना best दिया है  पुरी जान लगा दी । यहा अन्तर पैदा करता है जागरुकता (awareness) जिसकी जागरुकता (awareness) ज्यादा होगी उसकी संकल्प शक्ति भी उतनी ज्यादा होगी । यहा सैकेंड के दसवे हिस्से से हार जीत हो जाती है। जरा सा ध्यान बटा आप पिछड़ गये ।

 हम जागरुक (aware) कैसे बने, ध्यान कैसे लगाये ये हमे कही नही सिखाया जाता जितना हम अपने काम के प्रति सजग होते है विश्वशक्ति उतनी ही हमारी मदद करती है।

 अब बात करते है अपने अन्दर जागरूकता (awareness) कैसे बढाये ?
जैसे हम सजग होते है हम विश्वशक्ति के नजदीक होते चले जाते है और जितने हम विश्वशक्ति के नजदिक होते चले जाते है हमारी इक्छाए पुरी होती चली जाती है । आप सजग होने के लिए कुछ प्रयोग कर सकते है 
                   
 हम अपने शरीर के लिए बहुत कुछ करते है मगर शरीर को चलाता कौन   है
बुद्धि, हम बुद्धि के लिए क्या करते है ? हम शरीर के बारे मे बहुत कुछ सोचते है हम वह सब कुछ करते है जो मन करता है एक तरह से हम मन के आधीन है और मन चंचल होता है वह हमे सजग नही होने देता हम मन के आधीन होकर हर वह काम करते है जो  हमारे लिए अच्छा नही है हम कोई काम कर रहे है तभी एक विचार आया दूसरे  किसी काम का, अरे ये भी काम करना है अब हमारा मन दूसरे काम मे लग गया विचार पल पल बदलते रहते है और  जो काम हम कर रहे होते है मन उस पर से हटाकर अन्य कामो की तरफ ले जाता है और जो काम हम कर रहे होते है उसको हम सौ प्रतिशत नही दे पाते । कई बार तो हम उस काम को छोड़कर दूसरे काम म्रे लग जाते है। मन के आधीन रहते हुए हम किसी भी काम को अपना सर्वश्रेष्ठ नही दे पाते और सफलता हमसे दूर भागती है ।

प्रत्येक काम को ध्यान से करे जिस समय जो काम कर रहे है उसी के बारे मे सोचे । यह तो हम बचपन से सुनते आये है काम ध्यान से किया करो, स्कूल मे, घर मे सब जगह यह सुनने को मिलता है मगर यह कोई नही बताता किसी भी काम मे ध्यान कैसे लगाये ?

 ध्यान (meditation) से ही सजगता आती है और हम मन के गुलाम न बनकर उसको ही अपना गुलाम बना लेते है ध्यान का मतलब है आप जिस भी काम को कर रहे है उसी के बारे मे सोचे और तन मन और बुद्धि से सिर्फ वही काम करे
मान लीजिए आप खाना खा रहे है तो आप तन और मन से सिर्फ खाना ही खा रहे है अगर इस बीच मे कोई और विचार आता है इसमे उलझे नही सिर्फ उसे देखते रहे आप खाना खा रहे है तो सिर्फ खाना खा रहे है ।

 आप जिस समय जो काम कर रहे है उसमे तन मन से समर्पित हो जाना ही ध्यान है ।

 आप जिस समय जो भी काम करे, काम चाहे छोटा हो या बड़ा,संकल्प ले उसको मुझे अपने तन मन से सौ प्रतिशत  देना है उस  काम को करते हुए चाहे कितने भी अच्छे विचार आ रहे हो मुझे अपने मन की नही सुननी है उस समय सिर्फ अपने काम पर ही ध्यान लगाना है ।

 अगर आपने किसी भी काम मे तन और मन से सौ प्रतिशत देना सिख लिया
तो आप जो चाहते वही बन जाते हो ।

विश्वशक्ति आप को सब कुछ देने के लिए तैयार है ।   

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