Monday, 27 November 2017

How to study smart (in hindi)

                                


Exam शुरु होते ही सभी छात्रो पर प्रेशर बढ़ जाता है। कि अब पढ़ाई करनी है । स्कूल टीचर भी बोलते है, अब समय कम है जम कर पढ़ाई करे । मगर कैसे पढ़े ? कोर्स ज्यादा, समय कम दिखाई देता है। अब एसा क्या करे Relax होकर Study कर सके, कुछ बच्चे Topper होते है। अधिकांशतः  Average होते है जो Average होते है। उन पर ज्यादा प्रेशर रहता है। जितना वह कर सकते थे वह उतना भी नही कर पाते.


 आधा समय सपने देखने मे निकल जाता है। आधा उसे कैसे पूरा करने मे, 


सब बच्चो मे क्षमता होती है मै यहा मार्कस की बात नही कर रहा हू । मै बात कर रहा हू वर्तमान मे आप 100% तो दे ही सकते हो। आपने अगर अपना 100% दे दिया बाकी सब परमात्मा पर छोड दो बस आज मै अपना 100% दूगा चाहे कुछ भी हो जाय।


केवल सोचने से कुछ नही होता है । Study की Planing करनी होती है। जितने भी बड़े Businessman है Company के ceo है. वे अपनी Daily Planing करते है । आज उन्हे क्या करना है ?


सबसे पहले अपना Study का Time निश्चित करे आपको सुबह से पता होता है आपकी school की, Tuition की क्या Timing है। उसके अनुसार आप अपना Study का समय निश्चित करे। आपने आपना 4घंटे का  समय निश्चित किया तो आप 40-40मिनट के ही सेशन करे । 40मिनट के बाद 10मिनट का Relax करे उस 10मिनट मे आप कोई म्यूजिक सून सकते है। आँखे बन्द करके कोई मेडिटेशन कर सकते है। कुछ भी एसा करे जिससे आपका माइन्ड Relax हो।  
                     

मगर ज्यादातर करते क्या है ? Facebook पर बैठ जायेगे Whats app पर Chat शुरु कर देते है। t.v. देखने बैठ जाते है। Youtube पर Videos देखने लगते है। पता ही नही चलता कब 10मिनट हो गये फिर अपने आपसे ही कहते है। 10मिनट ओर, एसा करते करते 1घन्टे हो जाता है। माइन्ड को Relax  के लिये गये थे मगर यहा माइन्ड मे आपने ओर कचरा भर दिया माइन्ड थक गया अब आपका लेटने का मन कर रहा है। आप लेट गये ओर सो गये सारा Study का समय खत्म हो गया।



अगर आपको 10मिनट रिलेक्स करना है । तो 10 मिनट ही रिलेक्स करना है। उसमे आप 10मिनट का मेडिटेशन करे तो बेहतर  है आप मोबाईल को टूल की तरह युज कर सकते है उसमे 10मिनट का timmer लगा ले मेडिटेशन के  बाद फिर से 40मिनट के लिये Study करने के लिये बेठे। हमारा माइंड 40 या 50मिनट के बाद  किसी भी चीज के ग्रहण करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती चली जाती है।


Study Goal                                                                                           आपको यह पता होना चाहिये। आपको पढ़ना क्या है ? अधिकांंशतः एसा होता है जब हम Study करने बैठते है । हमे पता नही होता क्या पढ़े ?


Maths लेकर बैठे

अरे Chemistry कर लेते है।

अभी Chemistry खोलकर बैठे ही थे

अरे इसे छोडो Physics कर लेते है। Physics लेकर बैठे कोई सा Chapter खोला

 अरे ये नही ये पढ़ते है।                                                                                                                                                                                 

 अरे मुझे तो Math करना है। फिर Math लेकर बैठ गये सारा समय इसमे ही निकाल दिया कुछ देर Math की फिर मोबाईल लेकर बैठ गये फिर सो गये। हमारा Goal निश्चित होना चाहिये हमे कौन-कौन से Subject पढ़ने है। कौनसा Chapter पढ़ना है


How To Study- इसके लिये आप अपने दोस्तो से, Tuiter से स्कूल मे टीचर से पूछ सकते है।
                       

सबसे महत्वपूर्ण है Revise Smartly

 कोई आप से पूछे पांच दिन पहले क्या खाया था ? शायद आपको याद नही होगा। मगर आपका 6 महीने 9 महीने या 1 साल पहले  Birthday मनाया गया होगा। उसमे आपने जो भी खाया वह आपको याद है । क्योंकि उसका जिक्र birthday से कई दिन पहले से शुरु हो जाता है। कि उस दिन क्या बनेगा, birthday के बाद भी कई दिन तक चर्चा मे रहता है। खाना कैसा बना है यह चीज बहुत टेस्टी थी यह अच्छी बनी थी। इस लिये वह आपके माइन्ड मे सैट है।
4घंटे आपने Study को दिया उसके बाद आप का 1घंटा ओर रखना होता है वह है Revise के लिये


चार घंटे  Study की, उस 1 घंटे मे उसका Revise कीजिये।

सबसे महत्वपूर्ण है जब आप Study कर रहे हो तब आपके मांइड मे कुछ ओर विचार नही आना चाहिये जो भी आप Subject Study कर रहे हो उसी पर Focus होना चाहिये तभी आप अपना 100% दे सकते हो।


एक ओर समस्या जो मुझे लगता है । वह है नीद की अगर आप सुबह चार बजे उठ जाते है आप सात दस बजे सोते है। आपकी  नीद हुयी 6घंटे की आप दिन भर सोचते रहे मै आज 4बजे उठ गया था। तो आपका मन बार बार सोने के लिये कहेगा। आप ने नीद 6 घंटे की ली या 8 की या 5 की ली उस बारे मे सोचना ही मत, जब आप नींद के बारे मे सोचते हो तभी आप को थकान महसूस होती है। और आप सोने को मजबूर हो जाते हो। आप कितने बजे उठे इस बारे मे मत सोचो।

आपका भविष्य उज्वल बनता है वर्तमान मे 100% देने से, न कि भविष्य के सपने देखने से ।



Saturday, 25 November 2017

सपने नही कर्म से सफलता मिलती है

                                


एक पहाड़ी पर प्रसिद्ध देवी का मन्दिर था लगभग 15 किलोमिटर की पैदल चढ़ाई थी। नीचे एक दुकान थी । जहाँ  पूजा-पाठ का समान व यात्रीयो के आवश्यकता की वस्तुये मिलती था। जो उस दुकान का मालिक था कभी मन्दिर नही गया था। वह यात्रियों  से ही वहा की सुन्दरता की तारीफ सुनता था। और सोचता था, हमारे तो यह मन्दिर पास ही है कभी भी चले जायेगे ।

 धीरे-धीरे समय निकलता गया।


   उसे  बुढ़ापा आ गया उसने सोचा अब तो जीवन का अन्त नजदीक है अब तो मन्दिर की यात्रा की जाये। उसने सब तैयारी की । रात्रि मे यात्रा करते थे जिससे सुबह आरती के समय दर्शन हो जाये उसने एक लालटेन ली, और अपनी यात्रा शुरु की, अभी वह कुछ ही दुर चला था। उसके मन मे विचार आया उसकी लालटेन की रोशनी सिर्फ चार कदम तक ही साथ दे रही थी और मुझे 15किलोमिटर की लम्बी यात्रा तय करनी है । इस लालटेन के भरोसे यह कैसे तय होगी वह वही बैठ गया और सोचने लगा



जैसे जैसे उम्र बढ़ती है। होसला भी कम होता चला जाता है। वह निराश होकर बैठा हुआ सोच रहा था तभी एक यात्री उसके पास आकर उससे बोला- “कैसे बैठे हो”



वह बोला – ‘मै सोच रहा था 15किलोमिटर का रस्ता कैसे तय होगा ? मेरी लालटेन से तो सिर्फ चार कदम की रोशनी हो रही है।“



वह यात्री बोला-“मेरी लालटेन तो तुमसे भी छोटी है। इससे तो सिर्फ तीन कदम की ही रोशनी होती  है।



तुम्हारी तो फिर भी चार कदम दिखाती है। तुम एक कदम बढ़ाओगे तो चार कदम की रोशनी तुम्हे बराबर मिलती रहेगी कभी कम नही होगी तुमारी मंजिल तक चार कदम रोशनी तुम्हारे आगे बनी रहेगी हिम्मत करो और चलो, प्रकाश तुम्हारे आगे चलता रहेगा।



यही हम करते है आज का काम कल पर टालते रहते है जब समय कम रह जाता है तब अपनी यात्रा शुरु करते है समय कम यात्रा लम्बी घबराकर जाते है   सारा समय सपने देखते मे निकल जाता है। और जब भी उन्हे करने का प्रयास करते है निराश होकर बैठ जाते है। क्योकि यात्रा लम्बी है रोशनी कम है। अगर हम दो कदम बढ़ाते है तो रोशनी भी दो कदम आगे बढ़ती है। सपने देखने कोई बुरी बात नंही है। मगर सपने सोते हुये देखे जाते है। सपना देखा बात खत्म, अब आप जग गये अपने कर्म पर ध्यान दो आपको अपने वर्तमान पर ध्यान देना है अपना 100% वर्तमान पर लगा देना है, न की अपने सपनो पर, जो सिर्फ सपने देखते रहते है वे हमेशा सोये रहते है। और जो सोया हुआ है वह जीवन मे कुछ नंही कर सकता, सोचता रहेगा और सपने देखता रहेगा, मंजिल तक वही पहुचता है जो जग गया।



यह जीवन बहुत खूबसूरत  है। भविष्य के लिये वर्त्मान को खराब मत करो अधिकांशेत भविष्य को सुखद बनाने के लिये अपने वर्तमान को दुखद बना देते है। जबकि सच्चाई यह है भविष्य कभी आता ही नही आप वर्तमान मे रहते हो, आप अभी हो, इसी क्षण हो, जो भी आपको देना है अभी अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। अगर आप वर्तमान मे सर्वश्रेष्ठ देना सिख गये तो भविष्य तो आपका अपने आप स्वर्णिम हो जायेगा, यह जीवन वही जीते है जो आज मे जीते है।



 रोहित ने 10th  मै सपना देखा मुझे डाक्टर बनना है उसने 11th  मै PCB लिया, बात खत्म हो गयी उसने सपने देखा, जग गया, अब उसका ध्यान 11th  मै हो वल्कि वर्तमान मे है PCB मै है जो चेप्टर वह आज पढ़ रहा है सिर्फ उसमे है उसे उसमे अपना 100% देना है। कल के बारे मे नही सोचना, मुझे डाक्टर बनना है, नही  इसके वह सपने नंही देखता, सपने देखने के लिये सोना पडता है मगर वह जागा हुआ है। जो जागते हुये सपने देखते है वह जागे हुये नही है वह जागते हुये  सोये हुये के समान है जो भी करना है आज करना है अभी करना है वर्तमान ही जीवन है।



मगर कहने मे ये जीतना आसान लगता है, है नही, जगना प्रत्येक कार्य जगे हुये करना ये हम कैसे करे
ध्यान  से  करे,  ध्यान  लगाये
 मगर  कैसे ?
कहते सब है मगर ये कोई नही बताता

 ध्यान कैसे लगाये ? ध्यान लगाये बीना अपना 100% नही दे सकते हम कोई भी कार्य कर रहे है विचार कोई और चल रहा है और इसी को जागते हुए सोना कहा जाता है । जागना मतलब एक समय मे आप जो भी कार्य कर रहे है सिर्फ वही कर रहे है उसको आपने 100% दे दिया आप खाना खा रहे है तो सिर्फ खाना खा रहे है पानी पी रहे है तो सिर्फ पानी पी रहे है यह तभी सम्भव है जब आपके पास उस कार्य के अलावा दुसरा कोई विचार न आये
यह सब आता है ध्यान करने से, ध्यान का मतलब होता है अन्दर की सफाई




योगा कसरत आदि से हम सिर्फ बाहरी शरीर को स्वस्थ कर पाते है मगर ध्यान करने से हम अन्दर से स्वस्थ होते है अन्दर का कचरा साफ करते है जो फालतू के विचार हो वह निकलते है आप घर के अन्दर की सफाई करते है तो  कचरा उठाकर बहार फेकते है एसे ही जब हम ध्यान करते है तो अन्दर का कचरा जो किसी भी रूप मे है बहार फेक देते है सारे दिन न जाने कितने नकरात्मक सकरात्मक विचार हमारे मस्तिष्क मे आते है उनका सफाई करना आवश्यक है फिर हम जो भी कार्य करते है उसको100% दे पाते है प्रत्येक काम ध्यान से जगे हुए करते है ।  




Saturday, 5 August 2017

असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।

                       

   
शेर हमला करने से पहले अपने कदम पीछे हटाता है। जब कोई  बिल्डिंग आप देखते है चाहे वह दस मंजिला हो, बीस हो, पचास हो या एक मंजिला ही क्यो न हो, शुरुआत हमेशा जमीन से नीचे की ओर से होती है जमीन से नीचे जाए बीना आप एक मंजिला इमारत भी खड़ी नही कर सकते जितनी मजबूती से नीचे का कार्य होगा उतनी ही ऊपर की इमारत मजबूत होगी
 अगर डाक्टर बनना हो तो कम से कम पाँच साल लगते है इंजीनियर बनना हो तो चार साल लगते है
हम जब भी कोई काम शुरू करते है चाहे वह व्यापार हो अभिनय का क्षेत्र हो खिलाड़ी हो या कोई भी क्षेत्र हो, शुरुआत मे सफलता नही मिलती पहले नीचे की ओर, वरन असफलता झेलनी पड़ती है जितने भी सफल व्यक्ति है सब शुरुआत मे असफल हुए, आप किसी भी सफल व्यक्ति या महापुरुष का इतिहास उठाकर देख सकते हो ।
 शुरुआत मे सब नीचे की ओर गये फिर इमारत बननी शुरु हुयी ।
इसको आप प्रकृति का नियम भी कह सकते हो ।
शुरुआत मे नीचे की ओर जाते है जो घबरा गया या टूट गया उसका इस दुनिया मे कोई अस्तित्व नही रहता ।
और जो नीचे जा कर भी हिम्मत नही हारता वह दुगने जोश के साथ ऊपर उठता है ओर अपनी हार को जीत मे बदलता है जब भी हम कोई काम शुरु करते है तो कम से कम चार पाँच साल सिखने के होते है इन शुरुआती सालो मे ज्यादा आय की आशा न रखे अगर आप का ख्रर्चा भी निकलता रहे तो वह  बहुत बड़ी बात होगी । हमे सिर्फ अपने कर्म पर ध्यान देना है ।
मि, रमेश को अभिनय का शोक था उसने अभिनय को ही कैरियर बनाने की सोची उसने अच्छे अभिनय स्कूल से अभिनय का कोर्स किया उसके बाद कई थ्येटर किए छः माह तक उसे कोई काम नही मिला हिम्मत हार कर। वह वापस आ गया
 शाहरुख खान आज एक प्रसिद्ध अभिनेता है सुपर स्टार है जब वह दिल्ली से मुम्बई आये थे तो पाँच साल तक कोई काम नही मिला ।पाँच साल की खाक छानने के बाद फौजी सीरियल मे काम मिला । उसके बाद एक और सीरियल सर्कस मे काम करने का मौका मिला उसी दौरान उसे फिल्म दिवाना मिली । फिर उसने मुड़ कर नही देखा ।
 शुरुआत मे पाँच साल तक मुम्बई की गलियों मे धक्के खाते रहे अगर वह एक साल या दो साल मे हिम्मत हार जाता तो वह आज सुपरस्टार नही होता । उन शुरुआती पाँच साल जो उसके संघर्ष के थे वह नीचे की और जा रहा था दिन प्रतिदिन नींव मजबूत हो रही थी जब उसने ऊपर की और जाना शुरु किया तो नीचे की और झांककर  भी नही देखा आज वह सुपरस्टार है ।
 सफल और असफल लोगो मे यही अन्तर होता है असफल लोगो मे लड़ने की क्षमता नही होती उनकी विल पावर बहुत कम होती है जो सफल हुए है वह जब तक सफल नही हो जाते उनकी विल पावर दिन प्रतिदिन मजबूत होती चली जाती है वह अपने को सफल व्यक्ति की श्रेणी मे रखकर ही दम लेता है।
 यह दुनिया नकारात्मक लोगो से भरी हुयी है जिस प्रकार जंगल मे शेर बहुत कम होते है इसी प्रकार सफल लोग भी इस दुनिया मे बहुत कम है ।
 अधिकांशतः लोग असफल लोगो को ही देखते है उनसे अपनी तुलना करते है इसी कारण से वह ऊपर नही उठ पाते ।
 यह एक सृष्टि का नियम है जितना मांगोगे उससे कम ही मिलेगा
कोई बीस हजार रुपये महीने की आय का सपना देखता है तो वह बीस से नीचे ही रहेगा या उसके समकक्ष
कोई एक लाख का, तो कोई करोड़ का सपना देखता है तो वहा तक अवश्य पहुचेगा ।
 जैसा सोचोगे वैसा बनोगे
बड़ा सोचोगे तो बड़ा मिलने की सम्भावना बनी रहेगी ।
एक प्रोफेसर ने क्लास मे छात्रो से पूछा –“यहा से निकलने के बाद आप मे से कुछ नौकरी करेंगे कुछ व्यापार करेंगे । आपको कितने का वार्षिक पैकेज चाहिए जिससे आप संतुष्ट हो सके और सुखी जीवन जी सके ।
 कुछ ने चार लाख। कुछ ने छः लाख, कुछ ने दस, कुछ ने बीस लाख,
 सब ने अपने हिसाब से कुछ न कुछ बताया । पुरी क्लास मे एक छात्र एसा था जो कुछ नही बोला
प्रोफेसर ने उससे पूछा – तुमने कुछ नही बताया
उस छात्र ने कहा – सर जो मुझे चाहिए वह मै नम्बर्स मे नही बता सकता ।
प्रोफेसर ने आश्चर्य से पूछा –“ फिर कैसे बताना चाहते हो ।
सारी क्लास के छात्र भी उसे ही देख रहे थे ।
“सर इसके लिए हमे क्लासरुम से बहार जाना होगा ।
प्रोफेसर ने उसकी बात मान ली वह सब छात्रो के साथ बहार आ गये
वह छात्र अपने दोनो हाथो को पास लाया और बोला – मुझे इतना नही चाहिए “
फिर अपने दोनो हाथो को खोलता गया –“मुझे इतना भी नही चाहिए “
 फिर दोनो हाथो को आसमान की और फैलाते हुए बोला- जितना आसमान दिखता है मुझे उससे भी ज्यादा चाहिए ।

                 
 यह बोलते समय उसके आँखो मे एक अलग सी चमक थी ।
 प्रोफेसर ने ताली बजायी फिर सभी क्लासरुम मे आगये ।
 उन्होने कहा-यह लड़का एक दिन इतनी ऊचाईया छुएगा जहाँ नम्बर्स मायने नही रखते ।
 जो लोग सिर्फ कर्म को महत्व देते है वे नम्बर्स के गेम मे नही उलझते ।
 अमीताभ बच्चन शाहरुख खान मुकेश अंबानी आदि एसे लोग है जिनके पास इतना पैसा है पुरी जिन्दगी एशो अराम से काट सकते है ।उन्हे काम करने की कोई आवश्यकता ही नही है ।
अमिताभ बच्चन इस उम्र मे भी आज कितनी मेहनत करते है। उनके लिए नम्बर्स नही, कर्म महत्वपूर्ण है एसा करने मे उन्हे आन्नद की अनुभूति होती है प्रतिदिन एक नई उर्जा के साथ  उठते है और अपने कर्म के प्रति ईमानदार है ये कभी नही सोचते हमारे पास बेहिसाब दौलत है हमे काम करने की क्या जरुरत है या एक दिन काम नही करेगे तो क्या फर्क पड़ता है ?
 एसा सिर्फ आलसी और असफल लोग ही सोचते है और हमेशा दुखी और तनाव भरा जीवन जीते है ।
 इतने बड़े मुकाम पर पहुचने के बाद एसा नही है इनको असफलता नही मिलती शाहरुख खान की सारी फिल्मे हिट नही होती एक समया एसा भी आया अमिताभ बच्चन की फिल्मे एक के बाद एक फ्लाप हो रही  थी । मगर वह अपने कर्म के क्षेत्र मे अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहे ।
 असफलता का अफसोस नही होता बल्कि अगली बड़ी सफलता का प्लेटफार्म तैयार होता है अगर हम अपना सौ प्रतिशत देने को तैयार है तो सफलता असफलता मायने नही रखती ।
हमे यह सन्तुष्टी रहती है हमने अपना सौ प्रतिशत दे दिया आगे परमात्मा की मर्जी ।
 कभी असफलता से विचलित न हो, न ही सफलता से अतिउत्साहित हो । दोनो ही परिस्थितियों मे सम रहना है  दोनो ही परिस्थितियों मे आपके आन्नद मे हलचल नही होनी चाहिए ।
 आप सिर्फ कर्म करते चले जाओ अपना सौ प्रतिशत देते चले जाओ बाकी सब परमात्मा पर छोड़ दो आपको सफल होने से कोई नही रोक सकता ।


     

Monday, 31 July 2017

colour full happy life (in hindi)

           हमारी life होली के रंगों की तरह  colourfull है मगर उसको हम black & white बना देते है! colourfull reprasant करता है आनंदित जीवन का,black & white reprasant करता है सुख और दुःख का

,
 हमारी life है तो  colourfull  मगर उसको बना  देते है black & white,हमेशा उन चीजों में सुख ढूढ़ने का  प्रयास करते है जिसमे सुख है  नही,यह मानव शरीर परमत्मा की कृपा से   मिलता है तो आनन्द भी उसमेँ से हीं मिलेगा मगर हम आनन्द खोजने का प्रयास करते है सांसारिक वस्तुओ मे जिनमे आनन्द  नहीं,है।  कुछ क्षणो का सुख तो मिलता है मगर वह  भी बाद मे दुख का कारण बनता है जबकि सब जानते है जो चीज जहाँ से आती है उसको वही जाना पड़ता है आनन्द भी उसको वही से प्राप्त होता है जितना हम इस संसार के पीछे भागते है  हम परमत्मा से दुर  होते चले जाते है! actual  मे हमसे एक गलती होतीं है !


 मै सदा जीता रहूँ कभी मरुँ नहीं,मुझसे समझदार कोइ नही,मै ज्ञानी हुँ  मै सदा सूखी रहूँ !
                                                                                                                                                                               हम हमेशा अपने बारे मे गलत सोचते है ओर life को colourfull के स्थान  पर black & white बना देते है  इस संसार में कोइ ऐसा  नहीं जिसे मरना न हो, जो सुख चाहता है उसे दुख न  मिले, दुख  का  बड़ा कारण भी यही है सुख की कामना करना,कोइ भी  कामना करना दुख का कारण है, कामना भी दो प्रकार की होती है !


   सांसारिक भोग और संग्रह की कामना ,दूसरी होती है पारमार्थिक यानी अपने   कल्याण  की कामना,


 सांसारिक भोग और संग्रह क़ी कामना परधर्म है,यह  जो  नष्ट होने वाला है, शरीर मन बुद्धि आदि इसको संतुष्ट करने के लिये जो कामना  करते है वह परधर्म है  क्योकि कितनी भी धन सम्पत्ति ऐशो-आराम की वस्तुए हमारे पास इकट्ठी हो जाय, हमारा लोभ कभी कम नही होता निरन्तर बढ़ता चला जाता है हमे कभी संतुष्टि नहीं मिलती, कभी नुकसान  हो जाएं तो दुख होता  है!


 एक सन्त अपने शिष्य के घर गए  वहा देखा सब उदास थे उनका शिष्य किसी काम से घर से बहार गया उनसे रहा नही गया उन्होने शिष्य की पत्नि से पुछा -क्या बात  सब  परेशान है !
 पत्नि ने  जवाब दिया -इन्हे व्यापार में  घाटा हो  गया इसलीये थोड़े  परेशान है
 संत  ने पूछा -क्या ज्यादा घाटा  हो गया
 पत्नि ने उत्तर दिया -नुकसान भी नहीं हुआ और हो भी गया
 मै कुछ समझा नहीं '-
 गुरूजी बात दरअसल यह है इन्हे एक जगह से दस लाख का नफा होना था मगर वहा से इन्हे पांच लाख का  ही हुआ,यह पांच लाख का  नुकसान मान रहे है. इसलिए दुखी है

 जितना  हम संसार से  अपना सम्बन्ध जोड़ेगे, धन सम्पत्ति को अपना मानेगे उतना ही सुख और दुख के भंवर मे फंसे रहेंगे उसे कितनी भी धन -संपत्ति मिल जाय कभी संतुष्ट नहीं होता ,उसका लोभ बढ़ता ही चला जाता है हमे लगता है जितना हमारे पास धन -समपत्ति ज्यादा होगा उतने  हम सुखी होंगे यह हमारा अज्ञान औऱ दुर्भाग्य है जैसे कोई शराबी नशे मे बेहोश होकर गँदी नाली मे  पड़ा है और कुत्ते उसके ऊपर मूत्र त्याग करके जा रहे रहे है,फिर भी वह अपने को सुखी मानता है। सांसारिक धन सम्पत्ति से अपने को सुखी मानने वाले मनुष्य का सुख समुद्र से उठने वाली लहरो के समान है। यह केवल उसका  अज्ञान है। वे विनाशकारी एवं पतन की  ओर ले जाने वाले  क्षणिक सुख को ही असली सुख मान लेते है जबकि सांसारिक वस्तुओं,धन -संपत्ति आदि मे  सुख है ही नहीं,क्योकि इस सँसार मे जो भी वस्तुए है सब एक न  दिन नष्ट होने  वाली है उसका नाश निश्चित है। यहा तक की यह हमारा शरीर भी एक न एक दिन नष्ट होना है जिसे हम अपना मानते है।  जितना भी हम सांसारिक वस्तुओ की कामना करेँगे उतना लोभ भी बढ़ता चला जाता है हमे कभी संतुष्टि  नही मिल पाती,कामनाए कभी किसी की पूरी नही हुयी,कामनाए उस अग्नि के समान है जितना घी डालोगे उतना ही भड़केगी,हमारे दुःखो का मुल काऱण  हीं हमारी असीमित कामनाये है जब तक हृदय मे इक्छाये है आनन्द की अनुभूति नहीं हो सकती। कामनाये ही हमें उच्च विचारो से गर्त मे ले जाती है जिसके विचार अच्छे नही वह कभी आनन्द को महसूस नहीं कर सकते, जिसके विचार उच्च है  वह कभी दुखी नहीं रह सकता,उसके  ह्रदय मे कामना तो होती  है मगर वह सांसारिक भोग और संग्रह की नहीं होती,परमात्मा  से मिलन की होती है परम आनंद की होती है एक बार आनंद की अनुभूति हो जाय फिर इतना ज्ञान हो जाता है कि सांसारिक कामनाओ में सुख  है ही नही,


   प्रत्येक मनुष्य में two sources होती है good sources and bed sources,सांसारिक भोग पदार्थ व संग्रह की कामना ही सम्पूर्ण पापो का कारण है उस कामना के बढ़ जाने  से ही हमारे अंदर bed sources बढ़ते चले जाते है। जैसे धन  की  कामना अधिक बढ़ने से झूठ कपट,छल, बेईमानी आदि बढ़ जाते है वह यह सोचता रहता है अधिक से अधिक धन कैसे मिले-उसका लोभ बढ़ता ही चला जाता है। फिर वह अनुचित तरीके से धन अर्जित करने की कामना करता है। इससे उसका लोभ ओर बढ़ जाता है,वह धन के लिए अपने सगे- सम्बंधिओ,दोस्तों को भी धोखा दे देता है यहा  तक की वह हत्या करने में भी नहीं हिचकिचाता। इस प्रकार उसमे क्रूरता बढ़ती चली जाती है। उसमे लोभ के साथ-साथ अभिमान भी आ जाता है कि  हमने अपने प्रयास से,बुद्धिमानी से,होशियारी से ,चालाकी से इतना धन -संपत्ति मान  -सम्मान प्राप्त किया है। इतना और प्राप्त कर लेंगे। जैसे -जैसे लोभ बढ़ता चला जाता है उसकी कामनाये भी बढ़ती चली जाती है। उसका चिंतन भी बढ़ता चला जाता है-वह खाते -पीते,भोजन करते हुए,पूजा -पाठ.भजन -जप करते हुए भी धन कैसे बढ़े  चिंतन करता है इतनी संपत्ति और हो जाय इतना धन और बढ़ जाये तो अच्छा रहेगा।मेरा और मेरे बच्चो का भविष्य सुखी हो जायेगा।


 जब  अपने और अपने परिवार  बारे  सोचता है तब वह सांसारिक वस्तुओ की कामना करने लगता है अमुक चीजे हमारे  पास हो तो हम सुख  से रहेंगे एक के बाद एक वह वस्तुओ का संग्रह करता चला जाता है ऐसी कामना करते -करते वह कब बूढ़ा हो  गया उसे पता  ही नहीं चला कि इस सामग्री का वह क्या  करेगा और  यह वस्तुए किस काम  आएगी ? अंत में इसका मालिक कोन होगा ? मरते समय यह धन -संपत्ति  स्वयं  दुःख देगी,इस धन संपत्ति के लोभ के  कारण ही बेटा और बहु से डरना पड़ता है। अंतिम समय उसका कष्ट  पीड़ा में व्यतीत होता है।   मन में अशांति,हलचल आदि कब होते है ? जब  धन -संपत्ति,स्त्री -पुत्र आदि नाशवान चीजो  का सहारा लेते है ये सब चीजे आने -जाने वाली है। इनसे जब तक मोह,ममता  रहेगी,life में सुख -दुःख लगा रहेगा हमे कभी आनंद की अनुभूति नहीं होगी कभी मन शांत नहीं होगा। ये सब चीजे अपना कर्त्तव्य समझ कर करने की है, न कि उनसे ममता मोह में फसना है।


                                  मन की प्रसन्ता कैसे प्राप्त करे
 सांसारिक वस्तु ,सगे सम्बन्धी अन्य व्यक्ति,अनुकूल -प्रतिकूल परिस्थिति,समय,घटना आदि को  लेकर मन में राग -द्वेष  पैदा न होने दे।
 मन को सदा क्षमा, दया उदारता आदि भावो से परिपूर्ण रखे।
 अपने स्वार्थ और अभिमान  को लेकर किसी से पक्षपात  न करे।
 मन में सदा सबके हित का भाव रखे।
  सांसारिक कोई भी कार्य कर रहे हो मन में  प्रत्येक क्षण  परमात्मा का स्मरण करते रहे। उनके किसी भी नाम का  जप करते रहे।
ह्रदय में हिंसा,क्रोध ,क्रूरता आदि  भावो के  न रहने से,कोई हमारे साथ कैसा भी व्यवहार करे,हमारे अंदर राग -द्वेष पैदा न  होना।
प्रत्येक परिस्थिति में सिर्फ परमात्मा का सहारा होना ,उसका ही चिंतन करना, कोई भी कार्य उसका  समझ कर करना,जो कुछ भी हमारे पास है वह सब उसका ही समझना।
   अपने को सदा प्राणी मात्र  का सेवक माने।
मन प्रसन्न रहता है तो आनंद की अनुभूति अपने आप होने लगती। bed sources का स्थान good sources ले लेता है और life colourful हो जाती है।

Thursday, 15 June 2017

पैसा कमाने का आसान तरीका -सेवाभाव

                            

                    


सब पैसा चाहते है किसे पैसा नही चाहिए, पैसे के बिना इस संसार मे कुछ है भी नही,

धन दौलत इकटठी की जाए , खुब पैसा हमारे पास हो ।

यह एक अच्छी सोच है पैसो से ही आप स्वयं व आपका परिवार मनचाही जिन्दगी जी सकता है आपके जीवान की

 आवश्यकता की वस्तुए पैसे से ही खरीदी जा सकती है पैसो से ही आप गरीब व जरुरतमंद लोगो की मदद कर सकते 

हो अगर आपके पास पैसा है तभी आप अपने परिवार के साथ साल मे एक या दो बार पर्यटक स्थल पर घूमने जा सकते

 हो । धन एक वह साधन है जिसके माध्यम से जीवन का भरपूर आन्नद उठा सकते हो ।

  इस संसार मे परमात्मा द्वारा दिये गये साधनो मे से एक धन सबसे महत्वपूर्ण साधन है ।

 अक्सर हमे धार्मिक गुरुओ द्वारा यह सुनने को मिलता है धन समपत्ति सब माया है सब बेकार है एक दिन छूट ही

 जाना है फिर इसके पीछे क्यो भागे । कोई भी आश्रम मन्दिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा आदि सब माया से ही बनते है 

सतसंग पूजा बीना माया के नही होता । यह जीवन चलाने के लिए भी माया की आवश्यकता होती है बिना माया के इस

 संसार मे कुछ भी संभव नही ।

  जो लोग यह कहते है हमे पैसा नही चाहिए

 हम तो गरीब है

 पैसो का क्या करना है ?

उपरोक्त शब्द वही बोलते है जिनके अन्दर आगे बढने की ललक नही होती आलसी होते है हमेशा गरीबी का रोना रोते 

रहते है ।

या उन्हे पैसा कमाने का मौका नही मिला । पैसा तो कमाना चाहते है मगर पैसा कमाने का तरीका नही जानते ।

 सच्चाई यही है पैसा सब चाहते है मगर अधिकांशत पैसा उल्टे ढंग से कमाते है ।

पैसा कमाने के लिर पैसो का पेड़ बोना पड़ता है ।

सेवाभाव पैसो का बीज है आप अपने अन्दर सेवाभाव लाइये पैसो का पेड़ लग जायेगा ।

मगर अधिकांशतः लोगो का लक्ष्य पहले पैसा होता है और वे पैसो के दिवाने हो जाते है एसे लोगो के पास पैसा कम

 आता है पूरी जिन्दगी पैसा पैसा करते हुए बीत जाती है ।

कुछ लोगो के पास पैसा आ भी जाता है तो वे पैसो के इतने दीवाने हो जाते है वे अपनी आवश्यकता के लिए भी पैसा

खर्च नही कर पाते । सिर्फ संग्रह करते चले जाते है ।

 धन परमात्मा का वह साधन है जिसके द्वारा आप अपनी जिन्दगी आन्नद से गुजार सकते हो और दूसरो की मदद भी

 कर सकते हो देश विदेश का भ्रमण भी कर सकते हो आप अपने परिवार समाज देश की तरक्की मे सहयोग कर सकते 

हो ।

पैसा कमाने का लक्ष्य एक अच्छी सोच है मगर अपने अन्दर सेवाभाव विकसित कीजिए पैसो का बीज ही सेवाभाव है ।

 पहले  सेवाभाव यह पैसा कमाने का सीधा सरल रास्ता है।

 पहले पैसा यह पैसा कमाने का उल्टा रास्ता है आप किसी रेस्त्रा मे खाना खाने जाते है वहा वेटर आपकी सेवा मे 

उपस्थित होता है  मेज पर कपड़ा मारता है आपको पानी देता है उसके बाद आपसे आर्डर लेता है जितना समय खाना

 आन्रे मे लगता है आपको जलजीरा पेश करता है जलजीरे के गिलास ले जाता है मेज पर कपड़ा मारता है । फिर खाना

 लगाता है । बराबर आपकी सेवा मे उपस्थित रहता है ।

 वह हमेशा अच्छी टिप लेता रहेगा ।

          पहले सेवा फिर मेवा

एक बार मै और मेरी पत्नी लेडीज कपड़ो के शोरुम पर गये । सेल्संमैन ने शूट दिखाने शुरु किए शूट सब अच्छे थे मगर

 हमारे बजत से बहार थे वह काफी महंगा शोरुम था हमे पसन्द आने के बावजूद भी हम नापसन्द      करते रहे । वह

 मुस्कराते हुए एक के बाद एक शूट दिखाता रहा मगर सब हमारे बजट से बहार थे ।

अन्त मे हमने उससे कहा हमे पसन्द नही है हम उठकर जाने लगे ।

 तब सेल्समैन ने मुस्कराकर कहा –“कोई बात नही सर अगली बार आइये आपकी पसन्द के मुताबिक शूट अवश्य मिलेगा

 मै क्षमा चाहता हू मै आपकी पसन्द का शूट नही दिखा पाया ।“

 उसके यह शब्द मेरे दिल मे उतर गये उस सेल्समैन ने मेरे दिल मे जगह बना ली ।

 उसका मेरे ऊपर इतना प्रभाव पड़ा अगली बार से मै उसी के यहा से शूट खरीदता हू ।

कुछ सेल्समैन एसे होते है कुछ नही बल्कि ज्यादातर,

आपको समान दिखाते है आपको पसन्द न आने पर एक बुरा सा मुंह बनाते है कुछ तो अपशब्द भी बोल देते है ।

 जाने कहा कहा से परेशान करने आ जाते है

 न तो अपने समय का ख्याल है न दूस्ररे का

एसे लोगो की दूकान पर कोई मजबूरी मे ही जायेगा एसे लोगो का मकसद सिर्फ पैसा होता है मगर इनका पैसा कमाने

 का तरीका हमेशा उल्टा होता है एसे लोग कभी स्वयं भी खुश नही रहते । वे चिड़चिड़े और झगड़ालु प्रवृति के होते है

 जितनी उनमे क्षमता होती है उससे काफी कम ये पैसा अर्जित करते है इनके दिमाग मे हमेशा पैसा ही चलता रहता है

 एसे लोग पैसो के साधन का मजा नही ले पाते बल्कि पैसा ही इनके लिए सब कुछ हो जाता है ।

दो दोस्तो का एक ही कम्पनी मे नौकरी लगी दोनो की एक ही पोस्ट थी समान वेतन था ।

अगले पाँच सालो मे मि अ का वेतन मि ब के वेतन से पाँच गुना ज्यादा हो गया ।

 मि अ ने कम्पनी को अपनी कम्पनी समझ कर काम किया हर वह काम किया जिससे कम्पनी को फायदा पहुचे और

 उसकी बढोतरी हो ।

 जबकी मि ब ने उतना ही काम किया जितना उनका काम था काम किया बात खत्म हो गयी पैसे तो इतने ही मिलने

 है 

मि अ के दिमाग मे सिर्फ एक ही बात चलती थी किस तरह से कम्पनी को आगे बढाया जाए अपना काम तो वे करते

 ही थे वरन यह भी सोचते थे कम्पनी को आगे कैसे बढाया जाए ।

 इसलिए वह नया काम भी सीखते गये । कम्पनी को भी फायदा हुआ और उन्हे भी ।

 मि ब जैसे लोग जिन्हे सिर्फ पैसो से मतलब होता है जीवन मे ज्यादा तरक्की नही कर पाते है वह पाँच साल बाद भी 

वही के वही रहे आगे भी एसे लोगो की तरक्की नही होने वाली ।

 मि अ जैसे लोग अपने सेवाभाव वाले भाव के कारण काफी ऊचाईयो तक पहुँचते है ।

 सेवाभाव ही ज्यादा पैसा कमाने का बीज है अगर आप जिन्दगी मे आगे बढ़ना चाहते है तो अपने अन्दर सेवाभाव पैदा

 कीजिए ।

 दूसरो की हमेशा मदद करो

 अपने अन्दर उत्साह पैदा करो


 रुको मत जीवन मे आगे बढो ।

Wednesday, 17 May 2017

How To Be Successful In Life


           


'महंगाई बहुत है'   
'महंगाई के कारण पुरे महीने का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है'
'हे भगवान आज के इस महंगाई के दौर मे बच्चो को शिक्षित करना कितना मुश्किल होता जा रहा है'
उपरोक्त वाक्य हमे अक्सर सुनने को मिलते है
कभी आपने सोचा है ये कौन लोग बोलते है ?
गरीबी की रेखा मे रहने वाले लोग,
उससे थोड़ा ऊपर जिसे हम औसत कह सकते है
 निम्न मध्यवर्गीय कह सकते है
 ये सब अपने जीवन मे असफल लोग है जो सिर्फ अपना जीवन काट रहे है और किसी न किसी से चोट खाये होते है या कुछ करना तो चाहते थे मगर असफल हो गये, गिर पड़े,
उठे और दुसरी दिशा मे घिसटते हुए चल दिये यही वह लोग है जो हमेशा रोते रहते है
महंगाई बहुत है
कुछ ही चन्द लोग एसे है जिन्हे कभी महंगाई नही लगती अपनी आवश्यकता के अनुसार बड़े मजे से खर्चा करते है सही मे अगर जिन्दगी का मजा ले रहे है तो यही वह चन्द लोग है जिन्हे  हम सफल लोगो की श्रेणी मे रख सकते है ।
सफल व्यक्ति उसे कहा जा सकता है जिसे उसकी आवश्यकता की वस्तुए सस्ती लगने लगे ।
तीन तरह के लोग इस दुनिया मे पाये जाते है
गरीब, औसत और सफल
गरीब व्यक्ति इस लिए गरीब है वह अपने को गरीब मानता है वह हारा हुआ इन्सान है उसने गरीबी को अपनी तकदीर मान लिया है कभी उसने अपने को ऊपर उठने का प्रयास ही नही किया और सबसे ज्यादा शारीरिक मेहनत भी यही करता है । दिन मे कई बार यह अपने को याद दिलाता है वह गरीब है वह हमेशा परेशान रहता है तनाव मे रहता है उससे अगर आप बात करे तो आपको वह इतने दुख गिना देता है
‘मै जीवन मे बहुत कुछ कर सकता था मगर मुझे उसने धोखा दे दिया’
‘मेरी तो बीमारी ही जाने का नाम नही लेती’
आदि न जाने कितने दुखो के भवर मे फंसा है
इन सब तनाव को कम करने के लिए वह शराब का सहारा लेता है गरीब आदमी सबसे ज्यादा शराब पीता है और बच्चे पैदा करता है इससे वह कुछ समय के लिए अपने दुख भूल जाता है ।
औसत आदमी जीवन मे बहुत कुछ करना चाहता है मगर असफल हुआ,
गिरकर किसी तरह से उठा मगर फिर से न गिर जाऊ संभलकर चलने लगा जो कुछ मेरे पास है वह खो न जाए या कम न हो जाए उसकी सारी ऊर्जा उसमे ही लगी रहती है वह हमेशा इसी गुणा भाग मे लगा रहता है किस तरह खर्चा कम हो या कहा से पैसे बचाए जा सकते है ।
जबकि सफल व्यक्ति यह नही सोचता खर्चा कैसे कम हो बल्कि वह चिन्तन करता है कैसे अपनी आय बढाई जाए ।
 अब  बात करते है उन चन्द सफल लोगो की
सफल लोगो मे एक बात देखने मे आती है ये प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते है चाहे उधोगपति हो बड़े व्यापारी हो मन्त्री हो खिलाड़ी हो या किसी भी क्षेत्र मे सफलता हासिल की हो इसमे आपको गरीब निम्न उच्च मध्यमवर्गीय अमीर प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व मिलेगा ।
सफल, औसत और गरीबी की दलदल मे फंसे लोगो मे क्या अन्तर है ? जो चन्द सफल लोग है ये भी असफल हुए मगर हारे नही अपनी असफलता से बहुत कुछ सीखा ।
गिरे उठे और फिर दौगने जोश के साथ चल दिए और अपने गिरने के कारणो की समिक्षा की और आगे बढे
फिर गिरे
 उठे
फिर चौगने जोश के साथ अपने गिरने के कारणो की समिक्षा की और आगे बढे । अपनी असफलता से निराश नही हुए उससे सिखते हुए आगे बढते गये ।
 जितने भी सफल लोग है चाहे खिलाड़ी हो एकटर हो उधोगपति आदि  सभी कितनी बार असफल हुए है उनमे और औसत लोगो मे सिर्फ एक ही फर्क रहा है औसत असफल होने के बाद उठ नही पाये,
 उठे भी तो अपनी दिशा बदल ली सफल लोग असफलता से निराश नही हुए बल्कि उसे सिखने का माध्यम बनाया असफलता ही उनकी सफलता की प्रेरणा बनी ।
 जब किसी देश की क्रिकेट टीम मैच हारती है तो उसके हारने के कारणो की समीक्षा की जाती है अब तो टीम कोच मैच की विडियो बनवाते है और हारने के कारणो को खिलाड़ियो के साथ देखते है और उसकी समीक्षा करते है जो गलतियॉ उस मैच मे की थी अगले मैच मे उन गलतियो को सुधारते हुए पुरे जोश के साथ मैच खेलते है ।
 असफलता सिर्फ सिखने के लिए होती है जो सिखता है वही हार को जीत मे बदलता है ।
हार को जीत मे बदलने वाला ही सफलता के शिखर पर पहुचता है अगर हमारे अन्दर सिखने का जज्बा है तो असफलता भी हमारे लिए फायदे का सौदा हो सकती है
 मगर यह मनुष्य भी अजीब है जब यह जीतता है तो उसका श्रेय स्वय लेना चाहता है लोगो से सुनना चाहता है
मगर इसके विपरीत जब असफल होता है तो वह दोष दूसरो पर मढ़ना चाहता है ।
उसने मेरे साथ एसा किया इसलिये मुझे नुकसान उठाना पढा या उसके कारण आगे नही बढ पाया ।
 सफल व्यक्ति कभी दूसरो पर आरोप नही लगाता बल्कि अपनी प्रत्येक
असफलता को सकरात्मक दृष्टि से देखता है और उससे कुछ न कुछ अवश्य सिखता है ।
 औसत असफल व्यक्ति हमेशा अपनी कमिया छिपाता है और अपनी असफलता का दोष दूसरो पर मढता है ।
  ‘मै यह करना चाहता था मगर मेरे मां –बाप ने नही करने दिया ‘
इस तरह के डायलॉग हमे अक्सर सुनने को मिलते है
एसे लोगो से एक सवाल पूछे –
क्या सारे काम आपने मां –बाप की मर्जी से किये है फिल्मे देखना मोबाइल पर व्हाटसैप फेसबुक पर घंटो बैठे रहना यू टयूब पर विडियो देखना दोस्तो के साथ मस्ती करना , अगर यह सब काम आपने अपने मां –बाप की मर्जी के खिलाफ किए है
फिर वह एक काम जिसमे आपको लगता है आप बहुत कुछ कर सकते है मां –बाप की मर्जी के विरुध क्यो नही कर सकते ।
 यह सब बहानेबाजी है डर हमारे अपने अन्दर होता है हम अपने कमफर्ट जोन को छोड़ना नही चाहते और अपनी असफलता का आरोप दूसरो पर लगाते रहते है
सफल और असफल लोगो मे सबसे बड़ा फर्क यही होता है सफल लोग अपनी असफलता की जिम्म्रेदारी स्वयं लेते है और उससे कुछ  सिखते है और फिर पूरे जोश से आगे बढते है । असफल लोग असफल होने पर दोष दूसरो पर मढते है उस असफलता से सिखना तो दूर आगे बढने का होसला भी खो देते है ।
 असफलता ही सफलता की सीढी होती है जितने भी सफल लोग हुए है कितनी बार असफल हुए मगर असफलता से निराश नही हुए बल्कि उस असफलता को आगे बढने का माध्यम बनाया ।

थोमस एडिसन, kfc के मालिक कर्नल सैडर्स, निरमा कम्पनी के मालिक कर्सन भाई पटेल, सन्दीप महेश्वरी आदि एसे नाम है जो बार बार असफल हुए मगर हिम्मत नही हारी और एक दिन अपनी नजरो मे दुनिया की नजरो मे सफल कहलाए ।   

Featured post

· . प्रेम आत्मा का भोजन है।

     ·    ·  ....... प्रेम आत्मा का भोजन है। प्रेम आत्मा में छिपी परमात्मा की ऊर्जा है। प्रेम आत्मा में निहित परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग ...