Thursday, 31 May 2018

जोड़ो के दर्द का चमत्कारी तेल




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अगर आप भी कंधे के दर्द,  घुटने के दर्द,कम्रर और पीठ दर्द जोड़ो के दर्द से परेशान है तो इस दर्द के तेल को अवश्य अजमाकर देखे 
 इस तेल को बनाने की विधि भी बहुत आसान है ।

 तो जाने अदभुत दर्द का तेल बनाने की विधि


सरसो का तेल 500 ग्राम,तारपीन का तेल 200ग्राम , रतनजोत 40ग्राम, लहसुन की कलियॉ 100ग्राम, पुदीना सत 20ग्राम अजवायन सत 20ग्राम,कपूर 20ग्राम

सर्वप्रथम एक कांच की शीशी लेकर उसमे पुदीना सत, अजवायन सत,कपूर तीनो को डाल दे और शीशी का ढक्कन 

लगाकर हिला दे थोड़ी देर मे तीनो वस्तुए द्रवरुप हो जायेगी । इसको अमृतधारा कहते है ।

 लहसुन की कलियॉ छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ो मे काट ले, सरसो का तेल किसी भगोने मे डालकर गैस पर हल्की आँच 

पर रख दे और लहसुन की कलियॉ भी उसमे डाल दे । तेल को इतना पकाये की लहसुन की कलियॉ जल कर काली हो 

जाये । अब भगोने को गैस से उतारकर नीचे रख ले और उसमे रतनजोत डाल दे इससे तेल का रंग लाल हो जायेगा 

तेल के ठंडा होने पर इसको चलनी या कपड़े मे छानकर बोतल मे भर ले और इस तेल मे  अमृतधारा और तारपीन का

 तेल मिलाकर अच्छी तरह से हिला दे ।

 मालिश का तेल तैयार है जहाँ भी मालिश करनी है वहा एक चम्मच तेल डाले और और हलके हाथो से जब तक मसाज

 करे जब तक तेल सुख न जाये ।

joint pain ayurvedic treatment (in hindi)



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व्यस्त जीवन शैली और बढ़ती उम्र के साथ जोड़ो के दर्द की समस्या आम हो गयी है । जैसे जैसे उम्र बढ़ती है शरीर के 

विभिन्न जोड़ घिसने लगते है ऐसी स्थिति मे जोड़ो मे दर्द रहने लगता है । घुटनो और कन्धो मे दर्द रहने लगता है 

इसके अतिरिक्त कमर हाथ ऐड़ी हाथ आदि जोड़ो मे दर्द रहता है जैसे जैसे रोग बढ़ता है चलने फिरने मे भी भयंकर दर्द

 होता है 
 यूरिक ऐसिड अम्ल जोड़ो मे जमा होने के कारण जोड़ो मे दर्द रहने लगता है उसे गठिया (गाउटी आर्थ्रराइटिस कहा

 जाता है ।
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घुटनो के साथ साथ ही कन्धो का दर्द भी बड़ी तेजी से बढ़ रहा है । कन्धो को घेरने वाली माँसपेशियो मे सुजन आ 

जाती है स्वाभिक रुप से कन्धो के हिलने डुलने मे भयंकर पीड़ा होती है । जोड़ो का कार्टिलेज घिसने के बाद हड्डी

 घिसनी शुरु हो जाती है और घुटने कन्धे और रीढ़ की हड्डी मे दर्द शुरु हो जाती है यह समस्या 50 वर्ष की उम्र के 

बाद शुरु होती है जोड़ो मे हिलने डुलने मे चटखने की आवाज आती है । इसे आस्टियो आर्थराइटिस कहते है ।

 इसका हम आपको चमत्कारिक घरेलू उपचार बता रहे है । 
                                
असगन्ध नागोरी  90 ग्राम

सुरजान शीरी     90 ग्राम

सोंफ            90 ग्राम

सोंठ            30 ग्राम

जीरा            30 ग्राम

सुखा पौदीना      30 ग्राम

सनाय           30 ग्राम

काली मिर्च        5 ग्राम

रुमी मस्तगी      30 ग्राम

इन सबको कुट पीसकर चूर्ण बना ले और सुबह शाम 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने या सादे पानी से ले ।

दो से चार अखरोट की गिरी सुबह या रात को दुध के साथ ले

मसाज  - तिल के तेल से मसाज करे । तिल के तेल को गर्म करके एक से दो चम्मच तेल दर्द वाले स्थान पर डाले 

और हल्के हाथो से धीरे धीरे मसाज करे । मसाज जब तक करे जब तक तेल सुख न जाये।

        या
दर्द का चम्तकारी तेल से भी आप मालिस कर सकते है । (इसको गर्म नही करन है)

अपना पेट सही रखे,कब्ज न हो, अपने खाने पीने का ध्यान रखे ।

उरोक्त घरेलू उपचार अनुभव के आधार पर है अब तक सैकड़ो लोगो को फायदा हो चुका है

ज्यादा दर्द होने पर आप अपने चिकित्सक से सलाह ले ।

Monday, 19 February 2018

विश्वास की शक्ति से ही सफलता मिलती है



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सब चाहते है मेरे पास बहुत सारा पैसा हो  एक  शानदार घर हो, कार हो, आधुनिक आवश्यकता की सभी वस्तुये हमारे पास हो, साल मे एक या दो बार परिवार के साथ घुमने जा सके । हमे ये न कहना पड़े, चीजे बहुत महंगी है, बहुत महंगाई है ।  अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा और खुशहाल जीवन दे सके ।
ऐसी इच्छा सब की होती है । मगर विश्वास किसी किसी को होता है ।
सफलता का मतलव है जीतना
जो हम सोचते है वैसा ही हम बनते है । मगर मन में विश्वास हो तो पहाड़ भी हिलाया जा सकता है ।
आप अपने ऊपर विश्वास कीजिये, आप पहाड़ भी हिला सकते है । वास्तव में आप ऐसा कर सकते है । ज्यादातर लोगो को यकीन नही होता कि उनमे पहाड़ हिलाने की क्षमता है । इसी का परिणाम होता है । वह जिन्दगी भर औसत जिन्दगी जीते है ।
एसे लोग अक्सर यह कहते है । पहाड़ को रास्ते से हटाना नामुमकिन है ।
वे इच्छा तो रखते है मेरे पास बहुत सारा पैसा आये, मै भी अमीरो की तरह जिन्दगी जी सकू मेरे पास भी एक शानदार मकान हो, कार हो, सब सुख सुविधाये हो मगर यह सब सोचने से नही मिलता है ।
हमारे अन्दर विश्वास होना चाहिये ये मै कर सकता हू ।
अगर आप मे यह विश्वास पैदा हो जाये मै यह काम कर सकता हू । आप निश्चित ही एक दिन वह काम कर लेगे । भले ही कितनी भी रुकावटे आये, सैकड़ो नकरात्मक (negative) विचार आये आप अपने विश्वास के सहारे उन सबको पार करते हुऐ अपने लक्ष्य तक पहुच ही जाओगे जब आपका दृण विश्वास होता है, तो विश्व शक्ति आपके साथ होती है । आप जो चाहते हो वह आपको मिलता है ।
जिस व्यक्ति को यह विश्वास होता है । वह यह काम कर लेगा, उसे रास्ते भी मिलते चले जाते है । उसे उन रास्तो को खोजना मुश्किल नही होता और वह एक दिन सफलता की चोटी पर पहुँच ही जाता है ।
मगर अधिकाशंत जो इच्छा तो रखते है  मगर सोचते है, यह मै नही कर सकता हमेशा नकरात्मक (negative)शब्दो से घिरे रहते है  जब भी कुछ करने की सोचते है, नकरात्मक (negative)विचार आते है । वह नही कर सकता तो वास्तव में वह नही कर सकता, विश्व शक्ति भी सिर्फ उसी की मदद करती है । जिसका अपने ऊपर विश्वास होता है, अपने मन पर नियन्त्रण होता है । वह कुछ भी कर सकता है । उसे रोकने वाला जो मन है वह उसके वंश मे है ।
विश्वास ही वह शक्ति है । जो प्रत्येक वैज्ञानिक खोज के पीछे होती है । प्रत्येक सफलता में विश्वास ही वह शक्ति है जो साधरण व्यापार को बड़े व्यापार में बदल देती है । एक साधारण से व्यक्ति को बड़ा नेता बना देती है ।
विश्वास वह शक्ति है जो सब में होता है ।
अपने ऊपर विश्वास कीजिये आप सफल हो सकते है । आप सफल हो जायेगे ।
सारा खेल विचारो का है । जैसा आप अपने मस्तिष्क में भरते चले जायेगे वैसा ही  आप बनते चले जायेगे ।
आप एक फूल  का पौधा लगाते है  एक जहरीला पौधा लगाते है । आप दोनो को बराबर खाद पानी देते है आप कुछ दिनो के बाद नोट करेंगे जहरीला पौधा बड़ी तेजी से बढ़ रहा है जो आपने फूलो का पौधा लगाया है वह बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है जहरीला पौधा तेजी से अपनी जड़े जमा रहा है
एसे ही हमारे विचार है  जिस विचार के बारे में आप जितना सोचोगे उसकी जड़े उतनी मजबूत होती चली जायेगी जितनी जड़े मजबूत होगी उतना ही वह आप पर हावी होता चला जायेगा नकरात्मक (negative)विचार अपनी जड़े तेजी से फैलाते है आप पर जल्दी हावी हो जाते है ।  इसके विपरित जो सकरात्मक(positive) विचार होते है उनकी काट हमेशा नकरात्मक(negative) विचार करते है । अगर आप जागरुक (aware) हो तो नकरात्मक(negative) विचारो को जड़ सहित निकाल कर बहार फेक देते हो जो आप बनना चाहते हो जो आप का लक्ष्य है आप अपने लक्ष्य की और बढ़ने लगते हो, सिर्फ सकरात्मक विचारी को अपना दोस्त बनाओ उन्हे ही खाद पानी दो उनकी जड़े मजबूत करो और अपने आस पास के एसे लोगो को नजर अन्दाज करे जिनकी सोच नकरात्मक है ।
जो नकरात्मक विचार वाले लोग होते है  वे अपना अनुभव बयान करते है  क्योंकि वे कभी  जीवन भर कुछ न कर सके वे असफल और निराश रहे ।
हमेशा ऐसे लोगो से दूर  रहे उनसे बात भी करे तो उनकी बातो को इधर से सुने  उधर से निकाल दे, नही तो वे भी आपको अपने स्तर तक ले आयगे ।
हमेशा सकरात्मक विचार वाले लोगो से दोस्ती का हाथ बढ़ाइये जो स्वंय  भी प्रगतिशील विचार रखते है । उनके साथ आप भी ऊपर की ओर बढ़ सकते है । सफल लोगो की बायोग्राफी पढ़े । अपने अन्दर हमेशा उत्साद पैदा करते रहें, अपने को यह भरोसा दिलाये मै यह कर सकता हुं  मेरे लिये यह आसान है । मै अपने लक्ष्य तक पहुचने का रास्ता आसानी से तलास कर सकता हु ।
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एक विश्वास आपका अपने लक्ष्य के प्रति होना चाहिये ।
विश्वास रखिये आप जो चाहते है वह आपको अवश्य मिलेगा ।
केवल सोचने से इच्छा करने से कुछ नही मिलता है ।
विश्वास की शक्ति को मजबूत करे हमेशा सफलता के बारे में सोचे जब भी आपके सामने कठिन  परिस्थितिया आये आपको लगे आपकी राह कठिन है । अपने ऊपर विश्वास जताइये मुझे जीतना है । मै जीत कर रहूंगा मै इन मामूली सी बाधाओ को आसानी से पार कर लूगां कभी भी अपने विश्वास को डगमगाने न दे अपने को उत्साहित करते रहे मै कर सकता हुँ । अपनी चितंन प्रक्रिया में इन विचारो को हावी हो जाने दे मै अपने लक्ष्य तक पहुच कर  रहूँगा मुझे सफल होना है । सफलता के बारे में सोचने से आपका दिमाग अपने आप ऐसी योजना बनाना शुरु कर देता है । जिससे आपको सफलता मिलती है । इसके विपरीत अगर आप असफलता के बारे में सोचते है । तो आपका दिमाग एसे विचार ही सोचता है । जिससे आपको असफलता ही मिलती है ।
अपने आप को बार बार याद दिलाइये आपको सफल होना है । अपने लक्ष्य तक पहुचना है । आप उनसे कही बेहतर है । जो सफल हुये है । वे कोई सुपर मैंन नही थे । वे intelligent भी नही थे । न ही उनके पास कोई जादूई शक्ति थी । वे भी आपकी तरह एक मामूली इन्सान थे । उन्हे अपनी क्षमताओ पर पूरा भरोसा था वे अपने आपको कभी मामूली नही बल्कि महत्व्पूर्ण इन्सानमानते थे ।
हमेशा अपनी सोच को विकसित करे आपकी सफलता का आकार जितना बड़ा होगा आपकी सफलता भी उतनी ही बड़ी होगी आपके लक्ष्य छोटे होगे ता आपकी उपलब्धि भी छोटी ही होगी, इतना ध्यान रखे बड़े विचार बड़ी योजनाये छोटी योजनाओ से आसान होती है । जितना आप सोचते हो उसके अन्दर ही अपको मिलता है । कोई बीस हजार रुपये महीना सोचता है तो उसकी बीस से नीचे ही आय रहेगी कोई पाँच  लाख सोचता है । वह पाँच  लाख के आसपास अवश्य ही पहुचेगा और आप इससे भी बड़ा सोचते हो आपका अपने ऊपर विश्वास है । मै यहा तक पहुच सकता हु तो आप अवश्य एक दिन पहुचेगे । एक एसी शक्ति है  जो विश्व को संचालित करती है । आप जो माँगते हो वह अपको देने के लिए तैयार है । बस आपको अपने ऊपर विश्वास होना चाहिये आस्था होनी चाहिए आपको वह सब कुछ मिल सकता है । जो आप चाहते हो ।
अगर आपको लीडर बनना है । तो आपको विकास की योजना बनानी होगी कोई भी दुसरे का विकास नही कर सकता जब हम रेस लगाते है तो जिसकी तैयारी जितनी अच्छी होगी वह ही रेस में आगे रहेगा । कितना आप अपने ऊपर काम कर सकते हो । कितना त्याग कर सकते हो यह आपके लिए दूसरा नही कर सकता ।
केवल आत्मविकास की योजना पर चलकर ही आप सफलता की चोटी पर पहुच सकते हो ।

Thursday, 7 December 2017

osho quotes in hindi जीवन को बदलने वाले क्रान्तिकारी विचार

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हर आदमी अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए डरा हुआ है कि संपत्ति कहीं छूट न जाए । जिस यश को आप समझे हुए हैं मेरा है, आप बहुत गहरे में, प्रत्येक व्यक्ति जानता है, यश मेरा नहीं, क्षण में छूट सकता है । किसी का दिया हुआ है, बिलकुल उधार है, अभी छीना जा सकता है ।

भय को देखें और समझें कि वह क्यों है ? बिना उसे समझे भय-मुक्ति के उपाय की कोशिश मत करें । और मेरा कहना है, जो समझ लेता है, उसे उपाय करने की कोई जरुरत नहीं रह जाती । क्योंकि जिसने समझ लिया कि भय क्यों है, उसका भय गया । भय को खोजते ही से भय चला जाएगा ।

ये सिकंदर और नेपोलियन और हिटलर कोई बहादुर आदमी मत समझना, ये सब भयभीत लोग हैं । असल में ये दूसरे को मार कर अपने को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि हम इतने लोगों को मर सकते हैं तो हमको कौन मार सकेगा ! कुल और कोई बात नहीं ।


मिटना हमें कंपाता है । दूर लगती हो म्रृत्यु, फिर भी पास है । सत्तर साल बाद, क्या फर्क पड़ता है ? म्रृत्यु सदा आपके निकट खड़ी है । म्रृत्यु से ज्यादा पड़ोस में और कोई भी नहीं । उस म्रृत्यु की प्रतीति कंपाती है।


तुम तिनके का सहारा खोज रहे हो और मैं जानता हूं कि तिनके से कोई बच नहीं सकता । शायद तिनके के कारण ही तुम डूब जाओ । क्योंकि जिसने तिनके को नाव समझ लिया, वह फिर नाव की खोज बंद कर देगा । और जिसने झूठे किनारे को देख लिया, उसका असली किनारा फिर बहुत दूर है ।

तुम आकाश को देखो, कि सागर को, कि सरिता को, कि जो भी तुम्हारे पास आए या कोई भी तुम्हारे पास न आए, तुम अकेले बैठे हो, तो भी तुम्हारे चारों तरफ प्रेम झरता है । जैसे एक दीया अकेले में जलता हो, तो भी किरणें बरसती रहती हैं । प्रेम तब तुम्हारा स्वभाव है ।
कौन कंपता है ? शरीर तो कंप नहीं सकता, क्योंकि शरीर पदार्थ है । आत्मा कंप नहीं सकती, क्योंकि आत्मा अमृत है । फिर कौन कंपता है ? यह शरीर और आत्मा के बीच में वह जो तादात्म्य का सेतु है, वह जो ब्रिज है, वह कंपता उसका है, सारा भय उसका है ।

तुम भय से डरो मत । क्योंकि तुम भय से जितने भागोगे, डरोगे, उतनी ही तुम्हारे जीवन की तपश्चर्या और अग्नि क्षीण हो जाएगी । क्योंकि भय तो धौंकनी है । उससे तो अग्नि प्रज्वलित होती है । जहां-जहां भय हो, वहीं चुनौती को स्वीकार कर के प्रवेश करो । उसी से तो योद्धा पैदा होता है ।

भय से जागो ।     जब सारा शरीर कंपता हो तब भी तुम्हारी चेतना न कंपे, चेतना अकंप रहे, तो भय धौंकनी हो गयी ।

जो भय का उपयोग करना सीख लेता है, नानक कहते हैं, उसके लिए भय धौंकनी हो जाता है । और हर भय की अवस्था तपस्या की अग्नि को प्रज्वलित करती है ।

ध्यान की कला भी चोरी जैसी है । वहां इतना ही होश चाहिए । बुद्धि अलग हो जाए, सजगता हो जाए । जहां भय होगा, वहां सजगता हो सकती है । जहां खतरा होता है, वहां तुम जाग जाते हो । जहां खतरा होता है, वहां विचार अपने-आप बंद हो जाते हैं । इसलिए नानक कहते हैं, ‘भय धौंकनी है । ‘

ऐसी कोई भी चीज जीवन में नहीं है जिसका उपयोग न हो सके । कामवासना ब्रहाचर्य बन जाती है । क्रोध करुणा हो जाता है । भय प्रार्थना बन जाता है । दुख तपश्चर्या हो जाती है । कलाकार चाहिए, कुशलता चाहिए । और नहीं तो जीवन जो महल बन सकता था, वही तुम्हारे लिए काराग्रह बन जाता है । तुम पर सब निर्भर है ।
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अपने भीतर जो भी छिपा है, उसे जानने में लगें । और देखें कि जैसे-जैसे आप जानते जाएंगे, वैसे-वैसे आप पाएंगे कि वे ही शक्तियां जो आपके लिए घातक सिद्ध होती थीं, आपके लिए साधक हो गई हैं । वे ही जो आपके लिए मार्ग के पत्थर थे, सीढ़ियां बन गई हैं ।
जो व्यक्ति भय के प्रति सचेत हो जाएगा, भय का जो भी जीवन संरक्षक तत्व है वह शेष रह जाएगा और बाकी सब भय विलीन हो जाएंगे । जो व्यक्ति क्रोध के प्रति सचेत हो जाएगा, क्रोध में जो भी जीवन संरक्षक है वह शेष रह जाएगा और जो जीवन संरक्षक नहीं है वह विलीन हो जाएगा । और तब क्रोध ही तेज बन जाता है । जिस व्यक्ति में क्रोध ही नहीं, उसमें तेज ही नहीं होता ।

आपको पता नहीं है कि ईश्वर है, तो अपने बच्चे को मत सिखाएं कि ईश्वर है । बच्चे को कहें कि मैं भी खोज रहा हूं, लेकिन अब तक मुझे कुछ पता नहीं चला । मेरे प्राण भी प्यासे हैं कि मैं जानूं कि यह क्या है जीवन ? उसके लिए चाहिए साहस, उसके लिए चाहिए अभय, उसके लिए चाहिए अदम्य जिज्ञासा

छोटा सा बच्चा है, आप क्या कर रहे हैं उसके साथ ? पूरी मनुष्य-जाति के साथ यह पाप हुआ है, कि धर्म के नाम पर भय सिखाया गया है_ नरक का भय, पाप का भय; और सिखाया गया है प्रलोभन_ स्वर्ग का प्रलोभन और भय, दोनों संगी-साथी हैं, दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं ।

यह सारी दुनिया में_ भगवान को भय करो, भगवान से डरो_ इसका यह परिणाम हुआ है कि सारी दुनिया आज भगवान के खिलाफ खड़ी हो गई है । यह उस घ्रणा का इकट्ठा विस्फोट है जो हजारों साल से मनुष्य के मन में इकट्ठी होती रही है । क्योंकि जिसको हम भय करते हैं उसके प्रति घ्रणा पैदा हो जाती है ।

भय किस बात का ? तुम खो क्या सकते हो ? कभी तुम सोचते ही नहीं कि खोने को कुछ भी नहीं है, फिर भी तुम इतने भयभीत हो रहे हो ! तुम्हारी हालत उस भिखारी जैसी है, जो रात भर जागता है कि कहीं कोई चोरी न कर ले । और है उसके पास कुछ भी नहीं, जिसकी चोरी हो सके ।

अगर तुम भय के कारण धार्मिक हो, अगर तुम लोभ के कारण धार्मिक हो, तो तुम्हारी धार्मिकता वास्तवकि नहीं है

जिसने सत्य को देख लिया, वह अपनी शून्यता को भी देख लेगा कि मेरे पास कुछ भी नहीं है । न चोरि हो सकती है, न छीन-झपट हो सकता है, न मैं लूटा जा सकता हूं । मेरे पास कुछ नहीं है । मेरा दिवाला निकलने का उपाय नहीं है । मैं व्यर्थ ही भयभीत हूं ।

धार्मिक व्यक्ति के लिए साधन ही साध्य हो जाता है, यात्रा ही मंजिल हो जाती है । चलना ही इतना सुखद है कि पहुंचने की चिंता कौन करता है ? यह रास्ता ही इतना प्यारा है कि मंजिल के सपने कौन देखता है ? और तब ऐसे व्यक्ति के लिए यही जगह मंजिल हो गई ।

जिससे हम प्रेम करते हैं, उसका भय खो जाता है; उससे रत्ती भर भय नहीं होता । उसके सामने हम नग्न हो सकते हैं, उसके सामने हम अपने ह्रदय को पूरा खोल सकते हैं, उसके सामने कोई चीज गुप्त रखने की जरुरत नहीं है । वह हमारा इतना अपना है कि अब छिपाने का कोई सवाल नहीं है ।

हमने डरा कर लोगों को अच्छा बनाने की कोशिश की है । और डर से बड़ी कोई बुराई नहीं है । यह तो ऐसे ही है जैसे कोई जहर से लोगों को जिलाने की कोशिश करे । भय सबसे बड़ा पाप है । और उसको ही हमने आधार बनाया है जीवन के सारे पुण्यों भी पाप जैसे हो गए हैं ।

तुम डरते हो जीवन के खोने से, क्योंकि जीवन से बड़ा तुम्हारे हाथ में कुछ भी नहीं है ।

जितनी ही प्रेम में गति होती है उतना ही अभय उपलब्ध होता है; प्रेम से भरा हुआ व्यक्ति डरता नहीं; कोई कारण डरने का न रहा । प्रेम म्रृत्यु से भी नहीं डरा सकते । तुम कहो, हम मार डालेंगे ! तो प्रेम करने को तैयार हो जाएगा, लेकिन डरेगा नहीं ।

और ध्यान रहे, पुरस्कार भय का ही रुप है । एक आदमी को हम कहते हैं, गलती करोगे तो नरक में सड़ोगे । यह भी एक डर है । और यह भी एक डर है कि अगर ठीक न किया तो स्वर्ग चूक जाएगा । यह भी एक डर है । स्वर्ग है, नरक है; पाप है, पुण्य है; और सब आदमियों को डरा दिया है ।
भय _ बहुत तरह के भय_ जो मानसिक हैं, हमें चारों तरफ से दबाए हुए हैं । उन्हें हमें पहचान लेना पड़ेगा ।

यह आदमी क्या कर रहा है । घुटने पर टिका हुआ आदमी, पैरों में गिरा हुआ आदमी, छाती पीटता हुआ आदमी, कराहता – चिल्लाता हुआ आदमी भय का सबूत है । लेकिन भय का नाम प्रार्थना है । और किसी शब्दकोश में नहीं लिखा हुआ है कि भय का मतलब प्रार्थना है, प्रार्थना का मतलब भय है ।

जब हम आनंद में होते हैं तो हम कभी नहीं पूछते, कभी नहीं पूछते कि जीवन क्यों है । लेकिन जब हम दुख में होते हैं, तो हम पूछना शुरु कर देते हैं कि जीवन क्यों है ? जीवन का अर्थ क्या है ? जब आप आनंद में होते हैं तब आप यह नहीं पूछते कि आनंद का प्रयोजन क्या है । लेकिन जब दुख में होते हैं तब जरुर पूछते हैं कि दुख का क्या प्रयोजन है ?

लेकिन डर से क्या अच्छा हुआ ? चोर कम हुए ? बेईमानी कम हुई ? काराग्रह रोज बढ़ते जाते हैं, चोर रोज बढ़ते जाते हैं । कोई कमी नहीं हुई, अदालतों ने कोई फर्क नहीं लाया, पुलिस से कोई अंतर नहीं पड़ता, कानून कुछ डरा नहीं पाता । भगवान थक गया, स्वर्ग-नरक सब थक गए; आदमी रोज बिगड़ता ही चला गया ।

ऐसा नहीं है कि हम आफिसरों को और सरकारी मिनिस्टरों को ही रिश्वत दे रहे हैं । बाप बेटे को रिश्वत दे रहा है, बेटे बाप को रिश्वत दे रहे हैं । चौबीस घंटे रिश्वत चल रही है । बाप घर आता है, चाकलेट खरीद ला रहा है । वह रिश्वत है । लेकिन वह देख नहीं रहा, वह कहेगा यह कि मैं अपने बेटे को बहुत प्रेम करता हूं ।

किसी और को धोखा देने का कोई अर्थ नहीं है, न कोई बड़ी हानि है । अपने को ही धोखा देना सबसे बड़ी हानि है । आदमी अपने को कुछ और समझे जाता है ।

जितना ज्यादा मैं अपने को शरीर से जोड़ लेता हूं, उतना ही शरीर को विश्राम नहीं मिलता । शरीर को विश्राम तभी मिल सकता है जब शरीर सिर्फ मेरा एक उपकरण है, उपयोग करता हूं, शांत छोड़ देता हूं । रात आप सो गये, शरीर आपका उपकरण नहीं है,

हम शरीर से बुरी तरह जुड़े हैं कि हम यह सोच ही नहीं सकते कि शरीर के बिना करवट बदलें । हम कैसे करवट बदलेंगे ? शरीर को कोई कठिनाई नहीं है, कठिनाई हमको है । जब तक शरीर करवट न ले, हम कैसे करवट लेंगे ।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आप में विपरीत लक्षण प्रकट होने लगते हैं । जैसे स्त्रियां पचास के करीब पहुंचकर पुरुष जैसी होने लगती हैं । अनेक स्त्रियों को मूंछ के बाल, दाढ़ी के बाल उगने शुरु हो जाते हैं । उनकी आवाज पुरुषों जैसी भर्राई हुई हो जाती है । उनके गुण पुरुषों जैसे हो जाते हैं ।
अभय भय के विपरीत नहीं है, अभय भय का अभाव है । निर्भयता भय के विपरीत है । निर्भयता भय का दूसरा अति छोर है ।

पुरुष में जो बेचैनी है, उसी के कारण उसने इतने बड़े साम्राज्य बनाए । पुरुष में जो बेचैनी है, उसी के कारण उसने विज्ञान निर्मित किया, इतनी खोजें कीं । पुरुष में बेचैनी है, इसलिए वह एवरेस्ट पर चढ़ा और चांद पर पहुंचा । स्त्री में वह बेचैनी नहीं है, इसलिए स्त्रियों ने कोई खोज नहीं की, कोई आविष्कार नहीं किया ।

स्त्री संतुलित है, उसके दोनों पलड़े बराबर हैं, चौबीस-चौबीस । और पुरुष में एक बेचैनी है, उसका एक पलड़ा थोड़ा नीचे झुका है, एक थोड़ा ऊपर उठा है । इसलिए अगर आप, छोटी बच्ची भी हो और छोटा लड़का हो, दोनों को देखें, तो लड़के में आपको बेचैनी दिखाई पड़ेगी । लड़की शांत दिखाई पड़ेगी ।

नाभि का केंद्र फियर और भय का केंद्र है । जैसे जननेंद्रिय का केंद्र सेक्स का केंद्र है, वैसे नाभि का केंद्र भय का केंद्र है । यह शायद आपको खयाल में आया होगा कि जब भी आप भयभीत होंगे, नाभि डांवाडोल हो जाएगी और परेशान हो जाएगी ।

जो आदमी भी जीवन में बहुत भयभीत हो उसे ध्यान के साथ नाभि के केन्द्र पर थोड़े प्रयोग करने जरुरी होते हैं ।

नाभि भय का केंद्र है । जिन लोगों का भय का केंद्र बहुत सक्रिय है, उनको थोड़ा नाभि पर ध्यान देना अत्यंत जरुरी है । इसलिए बहुत-बहुत प्राचीन समय से, जिस लोगों को युध्द की शिक्षा दी जाती, उनके नाभि केंद्र को ही सबल करने की कोशिश की जाती । भय वहीं पकड़ता है ।

जिसने जीवन को भरपूर जीया हो वही जीवन और म्रत्यु के चक्र को रोक सकता है ।
जाँन दि बैपटिस्ट शुध्द आग थे, आग ! उनका सिर काट दिया गया था । रानी ने आदेश दिया था कि उनका सिर एक प्लेट में रख कर उसे भेंट किया जाए, तभी उसे लगेगा कि देश चैन से रह पायेगा । और यही किया गया ।

ध्यान की जो शक्ति जगती है, उसको भी आप बाहर ले जाएंगे, वह तत्क्षण बाहर चली जाएगी । अगर आपको आंखें खुली रखने का मौका दिया जाए तो वह ध्यान की जो शक्ति जगी है, आपकी आंखों से तत्क्षण बाहर घूमने लगेगी । आप किसी व्यर्थ चीज पर उसको नष्ट कर देंगे ।

ओशो द्वारा दी गयी ध्यान-विधियों में सक्रिय ध्यान के चौथे चरण में हमें पूर्णत: स्थिर हो जाना होता है । इस संबंध में ओशो का सुझाव यहां प्रस्तुत है ।









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